Last Updated on December 17, 2024 by Ankur Sood
Himachal Pradesh. हिमाचल प्रदेश में बागवानी के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। प्रदेश सरकार ने उच्च घनत्व पौधरोपण (एचडीपी-2) परियोजना को लागू करने का बड़ा फैसला लिया है। यह योजना हिमाचल की बागवानी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का वादा करती है। इस परियोजना को सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने के लिए विश्व बैंक से वित्तीय सहायता मांगी जाएगी।
बागवानी के लिए आधुनिक कदम: सीएम ने दिए बड़े निर्देश
सोमवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बागवानी विभाग की समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री ने बागवानी विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रदेश में भंडारण और विपणन व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
उन्होंने मंडी मध्यस्थता योजना के तहत बागवानों से खरीदे जाने वाले सेब का पैसा डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजने की सुविधा शुरू करने का आदेश दिया। यह कदम बागवानों की आय में पारदर्शिता और सुधार लाने के लिए उठाया गया है।
Cold Storage और प्रसंस्करण यूनिट का होगा निर्माण
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि किसानों और बागवानों को उनके उत्पादों के उचित दाम दिलाने के लिए जिला स्तर पर आधुनिक कोल्ड स्टोरेज बनाए जाएंगे। इसके साथ ही, ऊना जिले में आलू की प्रसंस्करण यूनिट स्थापित करने की योजना पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।
सेब बागवानी के लिए 500 करोड़ की परियोजना
हिमाचल प्रदेश में सेब बागवानी के पुनरुद्धार के लिए सरकार 500 करोड़ रुपये की विशेष परियोजना पर काम कर रही है। यह परियोजना अगले पांच वर्षों में लागू की जाएगी।
2023-24 में बागवानों को क्या मिला?
- बागवानी विकास योजना के तहत इस वित्त वर्ष में 12.84 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिससे 4244 बागवानों को फायदा हुआ।
- 2024-25 में अब तक 9 करोड़ रुपये खर्च कर 3156 बागवानों को लाभान्वित किया गया है।
- एंटी हेलनेट स्कीम के तहत 14.45 करोड़ रुपये खर्च कर 1767 किसानों को लाभ दिया गया।
- हिमाचल पुष्प क्रांति योजना के तहत 11 करोड़ रुपये खर्च कर 750 लोगों को फायदा पहुंचाया गया।
बागवानों को मिलेगा सीधा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल के किसानों और बागवानों को उत्पादों का सही मूल्य दिलाने के लिए सरकार हरसंभव कदम उठाएगी। इससे न केवल उनकी आय में बढ़ोतरी होगी, बल्कि उनकी मेहनत का उचित मुआवजा भी मिलेगा।
बैठक में कौन-कौन रहा शामिल?
इस अहम बैठक में बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, बागवानी सचिव सी. पालरासु, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, बागवानी निदेशक विनय कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
यह परियोजना हिमाचल प्रदेश की बागवानी के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। उच्च घनत्व पौधरोपण और आधुनिक तकनीकों के साथ, हिमाचल के बागवानों का भविष्य सुरक्षित और समृद्ध होगा।
क्या आप भी हिमाचल की बागवानी क्रांति का हिस्सा बनना चाहते हैं? नीचे कमेंट में अपनी राय दें!



