हिमाचल में अब earthquake resistant मकानों का निर्माण, जानिए कैसे बचाएंगे ये आपकी जान

Now earthquake resistant houses are being built in Himachal

Last Updated on February 9, 2025 by Ankur Sood

Kullu. हिमाचल प्रदेश में अब earthquake resistant तकनीक से भवन और मकानों का निर्माण किया जाएगा। हाल ही में नेपाल, जापान, ताइवान और इंडोनेशिया जैसे देशों में आए भूकंप से हुई तबाही के बाद प्रदेश सरकार ने भी अपनी तैयारियों को मजबूत करने का निर्णय लिया है। इसी दिशा में प्रदेश में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिसमें निर्माण से जुड़े पेशेवरों को आधुनिक तकनीक सिखाई जा रही है।

हर पंचायत से पांच पेशेवरों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि हर पंचायत से पांच पेशेवरों को earthquake resistant तकनीक से भवन निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके तहत मिस्त्री, बढ़ई और बार बाइंडर्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे भूकंपीय क्षेत्रों में सुरक्षित भवन निर्माण की तकनीक सीख सकें।

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, पेशेवरों को संरचनात्मक डिजाइन, निर्माण सामग्री के चयन और निर्माण प्रक्रिया के दौरान ध्यान रखने वाले महत्वपूर्ण बिंदुओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है।

कुल्लू और बंजार में हो रही ट्रेनिंग, आधुनिक तकनीकों से कर रहे परिचय

वर्तमान में जिला कुल्लू के विकास खंड कुल्लू और बंजार में इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। कुल्लू के पेशेवरों को राजकीय बहुतकनीकी संस्थान सेउबाग में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जबकि बंजार के पेशेवरों को खंड विकास अधिकारी कार्यालय में छह दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

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प्रशिक्षण समन्वयक राकेश ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य हिमाचल में सुरक्षित और मजबूत भवन निर्माण को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी इस तरह की कार्यशालाएं जल्द ही आयोजित की जाएंगी।

Earthquake Resistant से निर्माण के क्या होंगे फायदे?

हिमाचल प्रदेश एक भूकंपीय संवेदनशील क्षेत्र में आता है, जहां समय-समय पर छोटे-बड़े भूकंप आते रहते हैं। ऐसे में भवनों को भूकंपरोधी बनाने से जान-माल के नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भूकंपरोधी भवनों में निर्माण सामग्री, डिज़ाइन और संरचनात्मक मजबूती पर खास ध्यान दिया जाता है, जिससे ये मजबूत और लचीले होते हैं। इस तकनीक के उपयोग से भवन भूकंप के झटकों को सहन करने में सक्षम बनते हैं और गिरने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है।

भविष्य में पूरे प्रदेश में लागू होगी यह योजना

प्रदेश सरकार इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को पूरे हिमाचल में लागू करने की योजना बना रही है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रशिक्षण पूरा होने के बाद हर जिले में प्रशिक्षित पेशेवरों की एक टीम होगी, जो स्थानीय स्तर पर भवन निर्माण में भूकंपरोधी तकनीकों का उपयोग सुनिश्चित करेगी।

इसके अलावा, नई इमारतों के नक्शे पास करते समय भूकंपरोधी तकनीकों का पालन करना अनिवार्य किया जा सकता है, जिससे प्रदेश को एक मजबूत और सुरक्षित संरचनात्मक आधार मिल सके।

प्रदेश में पहले भी आई हैं भूकंप से जुड़ी चेतावनियां

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में कई बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। विशेषज्ञों की मानें तो प्रदेश के चंबा, कांगड़ा, मंडी और शिमला जैसे कई इलाके उच्च भूकंपीय खतरे वाले जोन में आते हैं। ऐसे में भूकंपरोधी तकनीकों का इस्तेमाल न केवल जरूरी बल्कि अनिवार्य हो गया है।

जनता को भी जागरूक किया जाएगा

आपदा प्रबंधन प्राधिकरण न केवल पेशेवरों बल्कि सामान्य जनता को भी भूकंपरोधी निर्माण के प्रति जागरूक करेगा। भविष्य में गांव और कस्बों में विशेष जागरूकता अभियान चलाने की योजना है, जिससे लोग खुद भी अपने मकान मजबूत बनाने के लिए सही निर्माण तकनीकों का चयन कर सकें।

हिमाचल प्रदेश में भूकंपरोधी तकनीक से भवन निर्माण को बढ़ावा देने का फैसला एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम है। इससे न केवल प्रदेश के लोगों को सुरक्षित मकान मिलेंगे बल्कि भूकंप के दौरान जान-माल की हानि भी कम होगी। सरकार की इस पहल से हिमाचल प्रदेश एक भूकंपरोधी संरचनात्मक मॉडल विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

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  • Ankur Sood

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