Last Updated on February 12, 2025 by Ankur Sood
हिमाचल प्रदेश के बागवान अब आधुनिक खेती और सेब की नई किस्मों को अपना रहे हैं। पारंपरिक सेब बागानों की तुलना में अब हाई डेंसिटी प्लांटेशन (एचडीपी) को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। इस नई तकनीक से सेब की खेती अधिक लाभदायक और टिकाऊ हो रही है। बागवान नई किस्मों को अपनाकर कम समय में अधिक उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि हो रही है।
नई किस्मों की बढ़ती लोकप्रियता
Apple की पारंपरिक किस्मों की तुलना में नई किस्में जैसे गाला, डिलीशियस और फ्यूजी अधिक लोकप्रिय हो रही हैं। इन किस्मों की खासियत यह है कि इन्हें कम चिलिंग ऑवर की जरूरत होती है और ये जल्दी फल देने लगती हैं। उद्यान विभाग, वानिकी विश्वविद्यालय नौणी सोलन और पंजीकृत नर्सरियां अब तक करीब 12 लाख पौधे बागवानों को उपलब्ध करा चुकी हैं।
जलवायु परिवर्तन का असर और नई किस्मों की जरूरत
हिमाचल प्रदेश में जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फबारी में लगातार कमी आ रही है, जिससे पारंपरिक सेब उत्पादन प्रभावित हो रहा है। उदाहरण के लिए, रॉयल किस्म को 1200 घंटों से अधिक चिलिंग ऑवर की जरूरत होती है, जबकि नई किस्में सिर्फ 500 घंटों में भी अच्छा उत्पादन देती हैं। इससे कम बर्फबारी वाले क्षेत्रों में भी सेब की खेती संभव हो रही है।
नई किस्मों की विशेषताएं और लाभ
- कम चिलिंग ऑवर की जरूरत – कम ठंडे इलाकों में भी बेहतर उत्पादन।
- जल्दी फल देने की क्षमता – जहां पारंपरिक किस्में 8-10 साल में फल देती हैं, वहीं नई किस्में 3 साल में फल देना शुरू कर देती हैं।
- कम जगह में अधिक उत्पादन – अधिक घनत्व वाली खेती से कम जमीन में अधिक पैदावार।
- बेहतर गुणवत्ता और ऊंची बाजार कीमत – नई किस्मों के फल अधिक आकर्षक और स्वादिष्ट होते हैं, जिससे इन्हें बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।
- 261KM की रेंज वाला Ultraviolette Tesseract स्कूटर! मात्र ₹100 में 500KM की सवारी!
- 400 KM की रेंज वाली Mahindra XUV 3XO EV जल्द होगी लॉन्च! Nexon EV को मिलेगी टक्कर
- फिर लौटेगी ठंड! Himachal में शीतलहर का अलर्ट, जानिए कहां होगी बर्फबारी
नई किस्मों की मांग अलग-अलग ऊंचाई के अनुसार
| ऊंचाई का स्तर | लोकप्रिय सेब किस्में |
|---|---|
| निचली ऊंचाई (1000-1500 मीटर) | डार्क बेरॉन गाला, डेविल गाला, फेन प्लस गाला |
| मध्यम ऊंचाई (1500-2200 मीटर) | किंग रॉट, मेमा मास्टर, अर्ली रेडवन, रेड विलोक्स |
| ऊंचाई वाले क्षेत्र (2200-3000 मीटर) | पिंक लेडी, ग्रेनी स्मिथ, किंग फ्यूजी, सैन फ्यूजी, हैपके |
बागवानों के लिए सरकार की पहल
प्रदेश सरकार बागवानों को उच्च गुणवत्ता के पौधे रियायती दरों पर उपलब्ध करा रही है। उद्यान विभाग के पास अभी भी पर्याप्त पौधे उपलब्ध हैं। सरकार द्वारा हाई डेंसिटी प्लांटेशन को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं।
बागवानी विशेषज्ञों की राय
विनय सिंह, निदेशक, उद्यान विभाग – “बागवानी में बदलाव आ रहा है। हाई डेंसिटी प्लांटेशन के लिए नई किस्मों की मांग बढ़ रही है। इस साल अब तक विभाग 3.80 लाख पौधे बागवानों को उपलब्ध करवा चुका है।”
लोकेंद्र सिंह विष्ट, अध्यक्ष, प्रोग्रेसिव ग्रोवर्स एसोसिएशन – “जलवायु परिवर्तन को देखते हुए बागवानों को नई किस्मों का चयन करना चाहिए। सेब उत्पादन की बढ़ती लागत को देखते हुए चेरी, नाशपाती और जापानी फल जैसी वैकल्पिक खेती भी जरूरी हो गई है।”
डाॅ. कुशाल सिंह मेहता, बागवानी विशेषज्ञ – “क्लाइमेट चेंज और मार्केट डिमांड को देखते हुए बागवान परंपरागत किस्मों की जगह नई किस्में अपना रहे हैं। उद्यान विभाग उच्च गुणवत्ता के पौधे रियायती दरों पर उपलब्ध करवा रहा है।”
बागवानों के लिए यह समय क्यों सही है?
अगर आप एक बागवान हैं और अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं तो यह सही समय है नई तकनीक को अपनाने का। हाई डेंसिटी प्लांटेशन और नई सेब किस्में भविष्य में बागवानी का चेहरा बदलने वाली हैं। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि बागवानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
Also Read:






