Last Updated on November 9, 2024 by Ankur Sood
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुबंध आधार पर नियुक्त वन रेंजरों को 2022 का अतिरिक्त वेतनमान देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह निर्णय 2020 से लागू होने वाले वेतन लाभ के बारे में सुनाया। जस्टिस अजय मोहन गोयल की बेंच ने यह महत्वपूर्ण आदेश दिया कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को वित्तीय लाभ से वंचित नहीं कर सकती। इस फैसले के तहत, वन रेंजरों को 2021 के अनुबंध तक वेतन लाभ मिलेगा, और 2022 से पहले नियुक्त सभी वन रेंजरों को यह लाभ दिया जाएगा।
यह मामला उस समय सामने आया जब हिमाचल सरकार ने 2019 में वन रेंजरों की नियुक्ति अनुबंध आधार पर की थी, और उनकी सेवाएं 2021 में स्थायी रूप से स्वीकार की गईं। हालांकि, सरकार ने इन्हें 3 जनवरी 2022 के टैरिफ स्केल के तहत वेतन लाभ नहीं दिया, जिसके खिलाफ एक याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से यह मांग की थी कि उनकी अनुबंध सेवा को स्थायी माना जाए और उन्हें 2022 के वेतनमान के तहत लाभ दिया जाए।
हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले को चुनौती दी और आदेश दिया कि 2022 से पहले नियुक्त वन रेंजरों को भी इस लाभ का लाभ मिलना चाहिए। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने कैडर आधार पर जिला मजिस्ट्रेट पदों की संख्या 25 से बढ़ाकर 35 प्रतिशत कर दी है, और जिन जिला न्यायाधीशों ने पांच साल तक सेवा की है, उन्हें वैकल्पिक वेतन मिलेगा।
इस फैसले से न केवल वन रेंजरों को राहत मिली है, बल्कि यह हिमाचल सरकार के कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत भी है।



