Last Updated on February 11, 2025 by Ankur Sood
हिमाचल प्रदेश में बेटियों के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। अब बेटियों को भी Ancestral Property में बेटों के समान अधिकार मिलेगा। पहले की व्यवस्था में केवल बेटों को एक अलग इकाई माना जाता था, लेकिन नए संशोधन के तहत अब बेटियां भी एक स्वतंत्र इकाई होंगी और उन्हें भी उतना ही अधिकार प्राप्त होगा जितना एक पुत्र को मिलता है। यह बदलाव हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा 51 साल पुराने ‘हिमाचल प्रदेश भू-जोत अधिकतम सीमा अधिनियम-1972’ (Himachal Pradesh Ceiling on Land Holdings Act 1972) में संशोधन के बाद संभव हुआ है।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हुआ नया कानून
इस कानून को हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने अप्रैल 2023 में संशोधित कर पारित किया था। इसके बाद इसे केंद्र सरकार को भेजा गया, जहां से राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह कानून अब पूरे राज्य में लागू हो गया है। इस नए कानून के तहत, अब किसी भी परिवार की व्यस्क बेटी, चाहे वह विवाहित हो या अविवाहित, उसे भी एक स्वतंत्र इकाई माना जाएगा और उसे भी 150 बीघा तक की भूमि पर अधिकार मिलेगा।
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बेटे और बेटी को समान अधिकार
पहले के कानून में यह प्रावधान था कि किसी भी परिवार की व्यस्क संतान में केवल पुत्र को एक अलग इकाई माना जाता था और उसे 150 बीघा अतिरिक्त भूमि रखने का अधिकार था। लेकिन इस कानून में संशोधन के बाद अब बेटी को भी समान अधिकार मिल गया है। अब वह भी 150 बीघा भूमि की हकदार होगी और उसे भी अपने नाम से संपत्ति रखने का अधिकार प्राप्त होगा।
संशोधन में हुआ बड़ा बदलाव
इस कानून के तहत ‘हिमाचल प्रदेश भू-जोत अधिकतम सीमा अधिनियम-1972’ की धारा 4 की उप-धारा 4 में बदलाव किया गया है। पहले इसमें केवल ‘पुत्र’ शब्द शामिल था, लेकिन अब इसमें ‘या पुत्री’ जोड़ दिया गया है। इसका मतलब है कि अब बेटियों को भी वही अधिकार मिलेगा जो पहले केवल बेटों को दिया जाता था।
इस संशोधन से क्या होगा फायदा?
- बेटियों के लिए आर्थिक सुरक्षा – इस फैसले से बेटियों को आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा। अब वे अपनी Ancestral Property पर उतना ही अधिकार जता सकेंगी जितना बेटों को दिया जाता था।
- लैंगिक समानता को बढ़ावा – यह संशोधन महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता को स्थापित करने में मदद करेगा। यह एक बड़ा सामाजिक सुधार माना जा रहा है।
- विवाहित और अविवाहित बेटियों के लिए समान अधिकार – अब शादीशुदा बेटियों को भी पैतृक संपत्ति में समान हिस्सा मिलेगा, जिससे उन्हें उनके माता-पिता की संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकेगा।
- कानूनी विवादों में कमी – संपत्ति के बंटवारे को लेकर होने वाले कानूनी विवादों में कमी आएगी, क्योंकि अब बेटियों को भी संपत्ति का स्पष्ट अधिकार मिल जाएगा।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करेगा। अब बेटियों को उनकी पैतृक संपत्ति से वंचित करने की कोई कानूनी गुंजाइश नहीं रहेगी। इससे बेटियों का आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और वे भी अपने अधिकारों को लेकर अधिक जागरूक होंगी।
समाज में बदलाव की उम्मीद
इस फैसले के बाद उम्मीद की जा रही है कि समाज में बेटियों की स्थिति पहले से बेहतर होगी। अब माता-पिता को यह डर नहीं रहेगा कि उनकी बेटियां शादी के बाद आर्थिक रूप से असुरक्षित हो जाएंगी। यह फैसला न केवल कानून का सुधार है, बल्कि एक सामाजिक बदलाव की ओर भी संकेत करता है।
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