Last Updated on December 2, 2024 by Ankur Sood
New Delhi: दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Election) के मद्देनज़र राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। ऐसे में आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपनी रणनीति को और मजबूत करते हुए यूपीएससी कोचिंग संचालक और सोशल मीडिया स्टार अवध ओझा (Avadh Ojha) को पार्टी में शामिल किया है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को अवध ओझा को पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर केजरीवाल ने ओझा को पार्टी का पटका और टोपी पहनाकर उनका स्वागत किया।
Avadh Ojha का परिचय और उनका संघर्षपूर्ण सफर
Avadh Ojha का नाम यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कराने वाले बेहतरीन शिक्षकों में शुमार है। उन्होंने सिविल सर्विस परीक्षा (UPSC) की तैयारी की, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। इसके बाद उन्होंने शिक्षक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। अवध ओझा ने कई प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों में पढ़ाया और अपने विद्यार्थियों को प्रेरित करने का काम किया।
अवध ओझा का जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ। उनके पिता श्रीमाता प्रसाद ओझा पोस्टमास्टर थे। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के बावजूद, उनके पिता ने अपनी पत्नी को पढ़ा-लिखाकर वकील बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन बेच दी थी।
उतार-चढ़ाव से भरा करियर
Avadh Ojha का करियर कई उतार-चढ़ावों से गुजरा। यूपीएससी में असफलता के बाद, उन्होंने इलाहाबाद के एक कोचिंग संस्थान में पढ़ाना शुरू किया। हालांकि, वहां उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली। इसके बाद 2019 में, उन्होंने पुणे में “IQRA IAS Academy” की स्थापना की। उनकी यह अकादमी तेजी से सफल हुई। 2020 में उन्होंने यूट्यूब चैनल “Ray Avadh Ojha“ शुरू किया, जो छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय है।
अवध ओझा ने एबीसी अकादमी ऑफ़ सिविल सर्विस, चाणक्य आईएएस अकादमी, अनएकेडमी, और बर्थकुर आईएएस अकादमी जैसे संस्थानों में भी पढ़ाया है।
सोशल मीडिया पर प्रभाव
अवध ओझा न केवल एक शिक्षक हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी उनकी अच्छी खासी फॉलोइंग है। उनके मोटिवेशनल वीडियो और सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारियों को लेकर दिए गए टिप्स युवाओं को प्रेरित करते हैं। उनके वीडियो में उनकी बचपन की शरारतों और जीवन के संघर्षों की झलक मिलती है।
अवध ओझा की संपत्ति
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अवध ओझा की नेटवर्थ करीब 11 करोड़ रुपये है। कोचिंग संस्थानों के साथ-साथ, मोटिवेशनल स्पीकर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के तौर पर भी उनकी अच्छी आय है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान ने उन्हें एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व बनाया है।
मां से विवाद और संघर्ष का दौर
अवध ओझा की जिंदगी में संघर्ष का एक ऐसा दौर भी आया, जब यूपीएससी में अंतिम प्रयास में असफल होने के बाद उनकी मां ने उन्हें घर से निकाल दिया। इस घटना के बाद 2000 से 2007 तक अवध ओझा अपने घर नहीं गए। इस दौरान उन्होंने कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया और अपने सपनों को जिंदा रखा।
आम आदमी पार्टी में शामिल होने का उद्देश्य
आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद अवध ओझा ने कहा कि राजनीति में आने का उनका मुख्य उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करना है। उन्होंने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें राजनीति में आकर शिक्षा के लिए काम करने का मौका दिया है।
अवध ओझा ने कहा, “शिक्षा परिवार, समाज और राष्ट्र की आत्मा है। जितने भी महान राष्ट्र हुए हैं, उनकी सफलता की पृष्ठभूमि में शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।”
उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें राजनीति और शिक्षा में से किसी एक को चुनना पड़े तो वे हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता देंगे। उनका उद्देश्य राजनीति के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाना है।
पार्टी की उम्मीदें
आम आदमी पार्टी ने अवध ओझा को शामिल कर अपनी रणनीति को और मजबूत किया है। पार्टी को उम्मीद है कि शिक्षा के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता और लोकप्रियता पार्टी के लिए फायदेमंद साबित होगी।
निष्कर्ष
अवध ओझा का आम आदमी पार्टी में शामिल होना राजनीति और शिक्षा दोनों क्षेत्रों के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। उनकी प्रेरणादायक यात्रा और शिक्षा के प्रति समर्पण उन्हें युवाओं के बीच एक आदर्श बनाते हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका पार्टी के लिए कितनी फायदेमंद होगी, यह देखने लायक होगा।



