Last Updated on January 3, 2025 by Ankur Sood
भुंडा महायज्ञ: परंपरा और आस्था का अद्भुत संगम
हिमाचल प्रदेश के Shimla जिले के Rohru क्षेत्र में स्थित स्पैल घाटी में भुंडा महायज्ञ का आयोजन शुरू हो गया है। यह आयोजन हर बारह साल में किया जाता है और इसे देवता व आस्था का संगम माना जाता है। इस वर्ष, महायज्ञ के पहले ही दिन, मेले जैसा उत्साह और श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा देखने को मिला।
देवताओं की भव्य शोभायात्रा
महायज्ञ के पहले दिन देवताओं की शोभायात्रा ने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। विभिन्न गांवों से आए देवताओं की पालकी सजाई गई और उनके स्वागत में भक्तों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ माहौल को भक्ति से भर दिया। यह शोभायात्रा केवल धार्मिक महत्व नहीं रखती, बल्कि इसे सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी माना जाता है।
महायज्ञ का महत्व और परंपरा
भुंडा महायज्ञ हिमाचल प्रदेश की प्राचीन परंपराओं में से एक है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके माध्यम से पर्यावरण और सामाजिक एकता का संदेश भी दिया जाता है। महायज्ञ के दौरान यज्ञ की अग्नि से वातावरण को शुद्ध करने का प्रयास किया जाता है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और व्यवस्थाएं
महायज्ञ के पहले दिन ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु स्पैल घाटी में एकत्रित हुए। प्रशासन और आयोजकों ने श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पानी और ठहरने की उचित व्यवस्था की है। इसके अलावा, यातायात और सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया है।
महाकुंभ मेले जैसे दृश्य
स्पैल घाटी में भुंडा महायज्ञ के पहले दिन महाकुंभ मेले जैसी रौनक देखने को मिली। पारंपरिक पोशाक पहने स्थानीय लोग, रंग-बिरंगे तंबू और भक्ति से ओतप्रोत वातावरण ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने इस धार्मिक आयोजन को अपनी आंखों से देखने के लिए घाटी का रुख किया।
भुंडा महायज्ञ में युवाओं की भागीदारी
महायज्ञ में युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने इसे और भी प्रभावशाली बना दिया है। पारंपरिक नृत्य और गीतों के माध्यम से युवा अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। इस आयोजन ने युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने और परंपराओं को संरक्षित करने का अवसर प्रदान किया है।



