India में सस्ता, लेकिन दुनिया में महंगा: Gold की कीमतों में असमानता का राज़

Cheap in India, but expensive in the world: The secret behind the disparity in gold prices

Last Updated on November 18, 2024 by Ankur Sood

India. भारत में हाल ही में Gold की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अनुसार, सोमवार सुबह 11:40 बजे तक 10 ग्राम सोने की कीमत 74,740 रुपये रही। यह पिछले सोमवार के मुकाबले लगभग 1,000 रुपये की गिरावट है। यह दरें सितंबर में दर्ज निम्न स्तर के करीब आ गई हैं।

वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में बढ़ोतरी

इसके विपरीत, वैश्विक बाजार में Gold Rate में तेजी देखी गई है। भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते सोने की मांग बढ़ी है। सोमवार को, डॉलर की मजबूती में कमी आने से सोने के दाम में सुधार हुआ।

  • स्पॉट गोल्ड की कीमत: 1% की बढ़ोतरी के साथ $2,587.49 प्रति Ounce।
  • अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स: 0.9% की तेजी के साथ $2,592 प्रति Ounce।

भारत में सोने की कीमतें क्यों सस्ती हो रही हैं?

1. कमजोर घरेलू मांग

शादी के सीजन के दौरान भले ही भौतिक मांग में वृद्धि हुई हो, लेकिन वैश्विक स्तर पर Gold की कीमतों में गिरावट का असर भारत पर भी पड़ा है।

  • सोने पर प्रीमियम $3 प्रति औंस से बढ़कर $16 प्रति औंस हो गया है, जो खुदरा खरीदारी में मजबूती को दर्शाता है।
  • हालांकि, यह बढ़त गिरती वैश्विक दरों की भरपाई नहीं कर पाई।

2. भारतीय खरीदारों के लिए अधिक सुलभ

गिरती कीमतों ने भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सोना अधिक किफायती बना दिया है।

  • त्योहारों के दौरान उच्च कीमतों के चलते खरीदारी टालने वाले लोग अब अधिक खरीदारी कर रहे हैं।
  • हालांकि, यह रुझान कीमतों की गिरावट को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है।

3. वैश्विक आर्थिक प्रभाव

अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती और उच्च ब्याज दरों ने बिना ब्याज वाले निवेश जैसे सोने की अपील को कम कर दिया है। यह प्रभाव भारत में सोने की कीमतों को भी प्रभावित कर रहा है।

वैश्विक बाजार में सोने की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

1. सुरक्षित निवेश की मांग

मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोने की मांग एक सुरक्षित निवेश के रूप में बढ़ी है।

  • खाड़ी देशों जैसे कतर और ओमान में सोने की मांग में वृद्धि देखी जा रही है।
  • अस्थिर समय में सोने को सुरक्षित संपत्ति के रूप में प्राथमिकता दी जा रही है।

2. क्षेत्रीय खरीदारी और आर्थिक कारक

खुदरा और संस्थागत खरीदारी में वृद्धि ने भी सोने की कीमतों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दिया है।

3. मुद्रा विनिमय दर और आयात लागत

मुद्रा विनिमय दरों में अंतर और बढ़ती आयात लागत के कारण कई क्षेत्रों में सोने की कीमतें ऊंची हो रही हैं। स्थानीय कर, बाजार स्थितियां और लॉजिस्टिक चुनौतियां भी कीमतों में असमानता पैदा कर रही हैं।

भविष्य की संभावनाएं

डॉ. रेनीषा चैनानी, हेड रिसर्च – ऑगमोंट (गोल्ड फॉर ऑल), ने कहा:

  • “नए भू-राजनीतिक तनावों के कारण कीमती धातुओं की कीमतें इस सप्ताह फिर से बढ़ेंगी। सोने की कीमतें अल्पकालिक निचले स्तर पर आ गई हैं और 75,000 रुपये से 77,000 रुपये तक वापस उछाल की संभावना है। वहीं, चांदी की कीमतें 92,000 रुपये से 95,000 रुपये तक जा सकती हैं।”

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  • Ankur Sood

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