Last Updated on November 15, 2024 by Ankur Sood
Shimla: Himachal Pradesh में मुख्य संसदीय सचिव (CPS) की नियुक्तियों का मामला अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा छह CPS की नियुक्तियों को रद्द किए जाने और 2006 के संबंधित कानून को असंवैधानिक घोषित करने के बाद, सुक्खू सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है।
इस मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी सक्रियता दिखाते हुए सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है। BJP की यह याचिका Shimla के चौपाल से विधायक बलवीर वर्मा द्वारा दाखिल की गई है, ताकि सरकार की SLP पर कोई फैसला लेने से पहले विपक्ष का पक्ष भी अदालत में सुना जा सके।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद सियासी घमासान
बुधवार को Himachal Pradesh High Court के फैसले के बाद गुरुवार को पूरे दिन इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी जारी रही। मुख्यमंत्री सुक्खू ने शिमला लौटने के बाद अनाडेल हेलीपैड पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि हाईकोर्ट का फैसला अभी अध्ययनाधीन है। उन्होंने बताया कि कैबिनेट सहयोगियों के साथ चर्चा के बाद आगामी कदम उठाया जाएगा। हालांकि, देर शाम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख कर लिया।
Congress और BJP आमने-सामने
पूर्व मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी ने कहा कि उन्हें भारत की न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास है और वे अपने अधिकारों का पूरा उपयोग करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने के लिए विपक्ष हर संभव प्रयास कर रहा है। वहीं, पूर्व सीपीएस मोहनलाल ब्राकटा ने कहा कि कानून में सभी विकल्प खुले हुए हैं, और विपक्ष के आरोप तथ्यहीन हैं।
दूसरी ओर, BJP का कहना है कि कांग्रेस सरकार ने संविधान का उल्लंघन किया है और अदालत के आदेश का पालन करना चाहिए। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार की नीयत पर सवाल उठाए हैं और इसे राजनीति से प्रेरित बताया है।



