Last Updated on December 14, 2024 by Ankur Sood
Himachal Pradesh में आर्थिक संकट ने नया मोड़ ले लिया है। प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) के ठेकेदारों के भुगतान पर रोक लगने से हालात और गंभीर हो गए हैं। 21 नवंबर 2024 से ठेकेदारों को कोई भुगतान नहीं किया गया है, जिसके चलते ठेकेदारों, उनके कर्मचारियों, मजदूरों और परिवारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ठेकेदारों का संघर्ष: भुगतान न मिलने से काम ठप करने की चेतावनी
सूत्रों के अनुसार, PWD के ठेकेदारों को 820 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान अभी तक बकाया है। इनमें से ‘ए’ श्रेणी के ठेकेदारों का 50 लाख रुपए से भी अधिक का भुगतान अटका हुआ है। ठेकेदारों का कहना है कि विभाग द्वारा उनके बिल पास होने के बावजूद, उन्हें पैसा नहीं दिया जा रहा।
“अब हालत ऐसी हो गई है कि हम मजदूरों और कर्मचारियों को वेतन नहीं दे पा रहे हैं। कई ठेकेदार तो अपना काम बंद करने की तैयारी कर रहे हैं,” एक ठेकेदार ने बताया।
5000 ठेकेदारों और हजारों परिवारों पर संकट
Himachal में PWD के करीब 5000 ठेकेदार पंजीकृत हैं। इनके साथ जुड़े कर्मचारियों और मजदूरों समेत हजारों परिवारों की आजीविका खतरे में है। ठेकेदारों ने कई बार PWD इंजीनियरों और अधिकारियों से भुगतान की मांग की, लेकिन निराशा ही हाथ लगी।
ठेकेदारों का एक प्रतिनिधिमंडल PWD मंत्री से भी मुलाकात कर चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
Himachal का आर्थिक संकट: कहां से शुरू हुई मुश्किलें?
Himachal प्रदेश की मौजूदा सरकार पहले ही आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही है।
- राज्य पर कुल कर्ज 95,000 करोड़ रुपए से अधिक पहुंच चुका है।
- 9,000 करोड़ रुपए कर्मचारियों और पेंशनर्स के भुगतान के लिए बकाया हैं।
- केंद्र सरकार द्वारा मिलने वाली GST प्रतिपूर्ति राशि (लगभग 3000 करोड़ प्रति वर्ष) बंद कर दी गई है।
- रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट में हर साल कटौती की जा रही है।
- राज्य की कर्ज लेने की सीमा को भी केंद्र ने घटा दिया है।
सरकार की आमदनी का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन पर खर्च हो रहा है, जिससे विकास कार्यों और अन्य योजनाओं के लिए बजट की भारी कमी हो रही है।
ठेकेदारों का रोष: “काम किया, पैसा क्यों नहीं मिला?”
ठेकेदारों का कहना है कि उन्होंने समय पर काम पूरा किया, लेकिन भुगतान अटकने से उनका कामकाज ठप हो गया है। ठेकेदारों को अपने इंजीनियरों, मजदूरों और सप्लायर्स को पैसा देने में मुश्किल हो रही है।
“यह सिर्फ हमारा मुद्दा नहीं है। यह हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का सवाल है। सरकार को जल्द कोई कदम उठाना होगा, वरना हम सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाएंगे,” एक अन्य ठेकेदार ने अपनी नाराजगी जताई।
प्रदेश के विकास पर असर: अधूरे प्रोजेक्ट्स और थमी रफ्तार
ठेकेदारों के बकाया भुगतान न होने से प्रदेश में कई विकास कार्य ठप पड़ गए हैं।
- सड़कों का निर्माण और मरम्मत कार्य अधर में लटक गया है।
- नई परियोजनाएं शुरू होने से पहले ही रुक गई हैं।
- इससे राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन उद्योग पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
सरकार के पास क्या है विकल्प?
Himachal सरकार के पास अब सीमित विकल्प बचे हैं।
- केंद्र से मदद की मांग: राज्य सरकार केंद्र सरकार से विशेष आर्थिक पैकेज की मांग कर सकती है।
- राजस्व बढ़ाने की कोशिश: नई योजनाओं के जरिए अपनी आय बढ़ानी होगी।
- खर्च में कटौती: गैर-जरूरी खर्चों पर रोक लगाकर बचे हुए पैसे का उपयोग ठेकेदारों और विकास कार्यों के लिए किया जा सकता है।
क्या कहती है सरकार?
PWD के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “हमें ठेकेदारों का दर्द समझ में आता है, लेकिन सरकार के पास फिलहाल फंड की भारी कमी है। हम कोशिश कर रहे हैं कि जल्द से जल्द भुगतान किया जाए।”
हालांकि, ठेकेदार इस बयान से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ आश्वासन है और जब तक भुगतान नहीं होगा, उनकी समस्याएं खत्म नहीं होंगी।
क्या होगा हिमाचल के ठेकेदारों और विकास कार्यों का भविष्य?
Himachal प्रदेश का यह आर्थिक संकट सिर्फ ठेकेदारों तक सीमित नहीं है। इससे पूरे राज्य की विकास गति पर असर पड़ रहा है। अगर जल्द कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो ठेकेदारों के काम बंद करने से हालात और बिगड़ सकते हैं।
Himachal में यह संकट एक बड़ा सवाल खड़ा करता है:
क्या सरकार इस आर्थिक आपातकाल से उबरने में सक्षम है?
क्या ठेकेदारों को उनका हक मिल पाएगा?
इन सवालों का जवाब आने वाले समय में ही मिलेगा। लेकिन इतना तय है कि सरकार को जल्द कदम उठाने होंगे, नहीं तो यह संकट और गहराएगा।



