Last Updated on December 14, 2024 by Ankur Sood
Himachal Pradesh के Chief Minister Sukhwinder Sukhu एक बड़े विवाद में घिर गए हैं। शिमला के कुफरी इलाके में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में संरक्षित प्रजाति के ‘जंगली मुर्गा’ को परोसे जाने का मामला सामने आया है। यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित है और इसका शिकार करना अपराध माना जाता है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बीजेपी और पशु कल्याण संगठनों ने सरकार से इस पर जवाब मांगा है।
कार्यक्रम में ‘जंगली मुर्गा’ परोसा, CM ने नहीं खाया, लेकिन Health Minister ने किया सेवन
सूत्रों के मुताबिक, यह कार्यक्रम शिमला के दूरस्थ क्षेत्र कुफरी में आयोजित हुआ था, जहां मुख्यमंत्री सुक्खू ने भी शिरकत की। हालांकि, मुख्यमंत्री ने जंगली मुर्गा नहीं खाया, लेकिन राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और अन्य अतिथियों ने इसका सेवन किया। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में जंगली मुर्गा, बिच्छू बूटी (एक स्थानीय जड़ी-बूटी), और मक्के-गेहूं की रोटियां परोसी गई थीं।
यह जंगली मुर्गा हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में पाया जाता है और इसका शिकार करना कानूनी अपराध है। लेकिन इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कैसे संरक्षित प्रजाति को पकाकर परोसा गया?
बीजेपी और पशु अधिकार संगठन नाराज, सीएम से मांगा जवाब
सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी दल बीजेपी और पशु कल्याण संगठनों ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई है। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता चेतन भारता ने कहा,
“मुख्यमंत्री को इस पर तुरंत सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।”
पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा,
“जब सरकार ‘जन मंच’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए लोगों की समस्याओं को हल करने का दावा करती है, तब खुद ऐसे ‘पिकनिक’ कार्यक्रम आयोजित कर संरक्षित प्रजातियों का सेवन कर रही है। यह वन्यजीव अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है।”
उन्होंने आगे कहा,
“जंगली मुर्गे जैसी संरक्षित प्रजाति का शिकार करने पर जेल और जुर्माना हो सकता है। लेकिन यहां मुख्यमंत्री कार्यालय से मेन्यू छपवाकर इसे मंत्रियों को परोसा गया। सरकार को तुरंत इस मुद्दे पर जवाब देना चाहिए।”
पशु कल्याण संगठनों ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
घटना के बाद पशु कल्याण संगठनों ने भी इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने इस पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया, तो वे कानूनी कार्रवाई करेंगे।
एक पशु अधिकार कार्यकर्ता ने कहा,
“जंगली मुर्गा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि खुद सरकार के कार्यक्रम में इसका उल्लंघन हुआ। इसे न केवल नैतिक रूप से गलत माना जाएगा, बल्कि यह कानून का भी उल्लंघन है।”
विपक्ष ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
बीजेपी ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री सुक्खू और उनकी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इसे “अराजकता और लापरवाही” का उदाहरण बताया। बीजेपी ने सवाल उठाया कि जब सरकार खुद कानून तोड़ेगी, तो जनता से कानून का पालन करने की उम्मीद कैसे कर सकती है?
सरकार की चुप्पी से बढ़ रहा विवाद
हालांकि, सरकार ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन यह चुप्पी विपक्ष और जनता के गुस्से को और भड़का रही है।
क्या होगी इस विवाद का अंत?
इस घटना ने न केवल राज्य सरकार की छवि को झटका दिया है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण की गंभीरता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
- क्या मुख्यमंत्री इस विवाद पर माफी मांगेंगे?
- क्या जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी?
- क्या हिमाचल में वन्यजीव संरक्षण कानून का सख्ती से पालन होगा?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे। फिलहाल, इस घटना ने हिमाचल प्रदेश की राजनीति और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है।



