Last Updated on November 25, 2024 by Ankur Sood
Himachal High Court की डबल बेंच ने पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) को बड़ी राहत देते हुए घाटे में चल रहे नौ होटलों को बंद करने के आदेश पर रोक लगा दी है। सोमवार को न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश राकेश कैंथला की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। इससे पहले, 22 नवंबर को एकल पीठ ने इन होटलों को 25 नवंबर से बंद करने का निर्देश दिया था, जबकि अन्य नौ होटलों को 25 मार्च 2025 तक संचालन की अनुमति दी थी।
देनदारियां निपटाने के लिए सरकार से सहायता मांगी
पर्यटन निगम ने अदालत को आश्वस्त किया है कि सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों और मृत कर्मियों के परिजनों की 35 करोड़ रुपये की लंबित देनदारियों को 10 दिन से 6 महीने के भीतर निपटा दिया जाएगा। इसके लिए निगम ने सरकार से वित्तीय सहायता की मांग की है। अदालत में 19 और 22 नवंबर के फैसलों को चुनौती देते हुए बताया गया कि निगम खुद अपनी संपत्तियों का संचालन करने में सक्षम है।
निगम ने दी होटलों को बंद न करने की दलील
पर्यटन निगम ने अदालत को यह भी बताया कि होटलों में शादियों और अन्य कार्यक्रमों के लिए पहले ही 23 लाख रुपये की एडवांस बुकिंग हो चुकी है। यदि होटल बंद हुए, तो न केवल निगम की छवि प्रभावित होगी, बल्कि वित्तीय नुकसान भी होगा। निगम ने यह भी तर्क दिया कि पर्यटन का पीक सीजन चल रहा है, और इस दौरान होटल बंद करने से राज्य की पर्यटन अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
निजी हाथों में देने की जरूरत नहीं
अदालत की डबल बेंच ने स्पष्ट किया कि एकल पीठ के सुझाव का मतलब होटलों को निजी हाथों में देना नहीं था। सुझाव का उद्देश्य सेवानिवृत्त कर्मियों की देनदारियों को चुकाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करना था। अदालत ने कहा कि अगर निगम अपने होटलों का कुशल प्रबंधन कर सकता है और देनदारियां चुकाने में सक्षम है, तो उन्हें निजीकरण की कोई आवश्यकता नहीं है।
अगले कदम
निगम ने अदालत में यह भी भरोसा दिलाया कि मृत कर्मचारियों के परिजनों और 65 साल से अधिक उम्र के सेवानिवृत्त कर्मियों की देनदारियों को 10 दिनों में निपटा दिया जाएगा। अन्य सेवानिवृत्त कर्मियों की देनदारियां भी तय समयसीमा में चुकाई जाएंगी।



