Last Updated on December 25, 2024 by Ankur Sood
Himachal High Court ने उठाया कड़ा कदम
Himachal High Court ने एक कार्यकर्ता द्वारा दायर फिजूल और निराधार याचिका पर सख्त कार्रवाई करते हुए 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस प्रकार की शिकायतें न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग को दर्शाती हैं और न्यायालय का समय बर्बाद करती हैं।
क्या है मामला?
मामला एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा दायर की गई याचिका से जुड़ा है, जिसमें सरकार और प्रशासन के खिलाफ आरोप लगाए गए थे। याचिका में ऐसा कुछ भी ठोस तथ्य नहीं था जो यह साबित कर सके कि आरोप सही हैं। अदालत ने पाया कि शिकायत केवल प्रचार पाने और न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के उद्देश्य से दर्ज की गई थी।
Himachal High Court का रुख
हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा:
- “न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।”
- “ऐसी याचिकाएं अदालत के समय और संसाधनों की बर्बादी करती हैं।”
अदालत ने कार्यकर्ता को चेतावनी देते हुए कहा कि इस प्रकार की शिकायतें भविष्य में दायर करने से बचें।
क्या था कार्यकर्ता का दावा?
कार्यकर्ता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि राज्य प्रशासन ने सार्वजनिक हित में अपने कर्तव्यों का निर्वहन सही ढंग से नहीं किया। हालांकि, याचिका में दिए गए दावे स्पष्ट और प्रमाणिक नहीं थे। अदालत ने कहा कि आरोपों को सिद्ध करने के लिए कोई मजबूत सबूत पेश नहीं किया गया।
Himachal High Court का सख्त संदेश
हाईकोर्ट ने इस फैसले के जरिए एक सख्त संदेश दिया है कि फिजूल और बेबुनियाद याचिकाएं स्वीकार नहीं की जाएंगी।
- यह कदम न्यायिक प्रक्रिया के सम्मान को बनाए रखने के लिए आवश्यक था।
- अदालत ने कहा कि इस प्रकार की शिकायतें अन्य वास्तविक और महत्वपूर्ण मामलों को प्रभावित करती हैं।
50,000 रुपये का जुर्माना क्यों?
अदालत ने 50,000 रुपये का जुर्माना इसलिए लगाया ताकि इस तरह के मामलों पर रोक लगाई जा सके। जुर्माने की राशि का उपयोग सामाजिक कार्यों में किया जाएगा।
- यह राशि उन लोगों की मदद के लिए जाएगी जो वास्तव में कानूनी सहायता के हकदार हैं।
- जुर्माना लगाकर अदालत ने दिखाया कि फिजूल शिकायतें करने वालों के लिए यह आसान नहीं होगा।
सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए सबक
यह मामला उन सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए एक चेतावनी है जो बिना ठोस तथ्यों के शिकायत दर्ज कराते हैं।
- न्यायिक प्रणाली का दुरुपयोग करने से बचें।
- अगर किसी मुद्दे पर याचिका दायर करनी है, तो उसके लिए पर्याप्त सबूत और प्रमाण जमा करें।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल फिजूल शिकायतों पर रोक लगेगी, बल्कि अदालत का समय भी वास्तविक मामलों के लिए सुरक्षित रहेगा।
“न्यायालय ने दिखाया सख्त रुख: फिजूल शिकायत करने वालों को अब भुगतना पड़ेगा जुर्माना!”



