Last Updated on December 26, 2024 by Ankur Sood
हिमाचल प्रदेश में scholarship scam की पृष्ठभूमि
हिमाचल प्रदेश में एससी-एसटी छात्रों के लिए संचालित छात्रवृत्ति योजना में बड़े पैमाने पर घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। यह योजना छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से चलाई जाती थी। हालिया जांच में यह खुलासा हुआ है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई।
कैसे हुआ घोटाला?
छात्रवृत्ति योजना के तहत निजी और सरकारी कॉलेजों के छात्रों को वित्तीय सहायता दी जाती थी। लेकिन जांच के दौरान यह पाया गया कि कुछ कॉलेजों ने फर्जी नामांकन और फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर सरकार से धनराशि प्राप्त की। इसके अलावा, वास्तविक छात्रों तक यह सहायता पहुंचने के बजाय बिचौलियों और संस्थानों के खाते में चली गई।
छात्रवृत्ति के वितरण में खामियां
- फर्जी नामांकन: कई छात्रों के नाम पर फर्जी आवेदन किए गए।
- फर्जी दस्तावेज: जाति प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र के फर्जी दस्तावेज लगाए गए।
- पैसों की हेराफेरी: छात्रवृत्ति की रकम छात्रों के खाते में न जाकर कॉलेज प्रशासन या अन्य व्यक्तियों के खातों में चली गई।
कितने का हुआ नुकसान?
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस घोटाले में करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई है। यह धनराशि सीधे तौर पर उन छात्रों की है, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी।
घोटाले के प्रभाव
छात्रों पर प्रभाव
इस घोटाले के कारण गरीब और वंचित वर्ग के छात्रों को उनकी शिक्षा के लिए आवश्यक सहायता नहीं मिल पाई। कई छात्रों को अपनी पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी।
सरकारी योजनाओं की साख पर असर
इस प्रकार के घोटालों से न केवल सरकार की योजनाओं की साख प्रभावित होती है, बल्कि जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाने में बाधा भी उत्पन्न होती है।
जांच और कार्रवाई
प्रशासनिक कदम
राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। जांच के बाद अब तक कई अधिकारियों और संस्थानों पर कार्रवाई की जा चुकी है।
भविष्य की योजना
सरकार ने इस तरह के घोटालों को रोकने के लिए एक डिजिटल प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। इस प्रणाली के तहत छात्रों के दस्तावेजों का वेरिफिकेशन ऑनलाइन किया जाएगा।



