Russia Ukraine युद्ध से हिमाचल के धागा उद्योग पर संकट, नई भर्तियों पर रोक, 30% स्टाफ में कटौती

Himachal's yarn industry in crisis due to Russia-Ukraine war, ban on new recruitments, 30% staff cut

Last Updated on November 9, 2024 by Ankur Sood

Russia Ukraine के बीच जारी युद्ध का प्रभाव हिमाचल प्रदेश के धागा उद्योग पर गहराता जा रहा है। इस संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिससे हिमाचल प्रदेश के धागा उद्योग को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। रूस और यूक्रेन हिमाचल के धागा उद्योग के प्रमुख बाजार माने जाते हैं, लेकिन युद्ध के चलते इन दोनों देशों में मांग में कमी आई है और आपूर्ति बाधित हो गई है। इससे धागा उद्योग में उत्पादन और निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।

नई भर्तियों पर रोक और स्टाफ में कटौती

हालात इतने बिगड़ गए हैं कि धागा उत्पादन इकाइयों में नई भर्तियों पर रोक लगा दी गई है। साथ ही लागत कम करने के उद्देश्य से कंपनियों को 30 प्रतिशत तक कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी है। कई कंपनियां उत्पादन को बनाए रखने के लिए न्यूनतम स्टाफ के साथ काम कर रही हैं, जिससे श्रमिकों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ गया है।

कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि

युद्ध के चलते कई जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति बाधित हो रही है, जिसके कारण इनकी कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। धागा उत्पादन के लिए जरूरी सामग्री जैसे कपास और रंगों की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे उत्पादन की लागत में भी बढ़ोतरी हो गई है। कंपनियों को इस समय अपने उत्पादों की कीमतों को बढ़ाना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि इससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता पर असर पड़ सकता है।

निर्यात में गिरावट और मांग में कमी

रूस और यूक्रेन हिमाचल के धागा उद्योग के प्रमुख निर्यात बाजार हैं। युद्ध के चलते दोनों देशों की अर्थव्यवस्था में मंदी आई है, जिससे वहां से नए ऑर्डर मिलने में कमी आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता ने व्यापारिक रिश्तों को भी प्रभावित किया है, और कई व्यापारियों को अपना व्यापार जारी रखना मुश्किल हो रहा है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर

इस संकट का प्रभाव केवल धागा उद्योग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े अन्य व्यवसाय भी प्रभावित हो रहे हैं। धागा उत्पादन से जुड़े कई छोटे व्यवसाय जैसे कच्चा माल आपूर्ति, परिवहन, और अन्य सहायक सेवाएं भी इस संकट के कारण नुकसान में जा रही हैं। राज्य की अर्थव्यवस्था पर इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है, क्योंकि रोजगार में कटौती और मांग में कमी के कारण आमदनी में गिरावट हो रही है।

भविष्य की चुनौतियाँ

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रूस-यूक्रेन युद्ध का अंत जल्द नहीं होता, तो धागा उद्योग के सामने मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। निर्यातकों को नए बाजार तलाशने होंगे और उन्हें प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए उत्पादन में नवाचार लाना होगा। हालाँकि, इस चुनौतीपूर्ण समय में सरकार की तरफ से भी समर्थन की जरूरत है ताकि उद्योग इस संकट से उबर सके और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित रोजगार का माहौल बनाए रखा जा सके।

हिमाचल प्रदेश के धागा उद्योग के सामने आई इस चुनौती ने यह साबित कर दिया है कि वैश्विक घटनाओं का स्थानीय अर्थव्यवस्था पर सीधा असर हो सकता है, और ऐसे समय में सरकार और व्यापार जगत को मिलकर समाधान ढूंढने की जरूरत होती है।

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  • Ankur Sood

    नमस्कार! मैं अंकुर सूद, और मैं हिमाचल बुलेटिन्स के लिए लेखन करता हूं। मेरी विशेष रुचि ऑटोमोबाइल तकनीक, नौकरी संबंधित सूचनाओं, खेल, और हिमाचल की ताजा खबरों में है।मेरी कोशिश रहती है कि मेरे लेख पाठकों को उपयोगी और नई जानकारी प्रदान करें। हिमाचल प्रदेश से जुड़ी ताजा अपडेट, नई तकनीक की बातें, करियर के अवसर, और खेल जगत की रोमांचक खबरें आप तक पहुंचाने का मेरा यह प्रयास जारी रहेगा।आपके सुझाव और विचार मेरे लिए बेहद मूल्यवान हैं।

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