Last Updated on December 16, 2024 by Ankur Sood
Bilaspur, Himachal Pradesh. क्या आपने कभी सोचा है कि झील के नीचे से गुजरने वाला पुल हो सकता है? हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक शहर बिलासपुर को फोरलेन से जोड़ने के लिए गोबिंद सागर झील के नीचे अंडरवाटर टनल के निर्माण पर विचार किया जा रहा है। अगर यह महत्वाकांक्षी परियोजना साकार होती है, तो यह देश की पहली ऐसी परियोजना होगी, जो झील के तल के नीचे बिछाई जाएगी।
लुहणू मैदान से फोरलेन तक होगा सीधा कनेक्शन
बिलासपुर शहर का संपर्क किरतपुर-मनाली फोरलेन से टूट चुका है, जिससे यहां की आर्थिक गतिविधियों में कमी आई है। ऐसे में झील के नीचे से गुजरने वाली यह अंडरवाटर टनल शहर को मुख्य मार्ग से जोड़ने का बड़ा कदम साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पुल न केवल आवागमन को आसान बनाएगा, बल्कि व्यापार और उद्योग को नई दिशा देगा।
पर्यटकों के लिए बनेगा आकर्षण का केंद्र
इस अनोखे अंडरवाटर पुल से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि यह परियोजना पर्यटन को भी पंख देगी। गोबिंद सागर झील और इसके नीचे बनी यह टनल पर्यटकों के लिए एक अद्वितीय अनुभव होगी। झील के अंदर से गुजरते हुए यह यात्रा रोमांच और आधुनिकता का संगम पेश करेगी।
जर्मन तकनीक से होगा निर्माण
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए जर्मनी के विशेषज्ञों और उन्नत तकनीक का सहारा लिया जाएगा। इमर्शन टनल तकनीक और टनल बोरिंग मशीन जैसी एडवांस तकनीकों का उपयोग कर इस पुल को तैयार किया जाएगा। इमर्शन टनल तकनीक के तहत पुल के हिस्सों को पहले जमीन पर बनाया जाएगा और फिर झील के तल के नीचे इन्हें स्थापित किया जाएगा।
बजट और योजना का खाका तैयार
परियोजना की संभावनाओं को जांचने के लिए विशेषज्ञों की टीम का गठन किया जाएगा। अगर यह योजना व्यवहारिक पाई गई, तो इसे केंद्र सरकार की “सेतु भारतम योजना” के तहत प्रस्तावित किया जाएगा। शुरुआती अनुमान के अनुसार, इस पर कई सौ करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है।
पर्यावरण के प्रति जागरूकता
झील और आसपास के पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए निर्माण प्रक्रिया को अंजाम दिया जाएगा। जर्मन तकनीक न केवल पर्यावरण के अनुकूल होगी, बल्कि निर्माण को मजबूत और टिकाऊ बनाएगी। यह परियोजना हिमाचल प्रदेश को देश में आधुनिकता और प्रगति के नए मानकों पर स्थापित कर सकती है।
टेक्नोलॉजी और विकास का अनोखा संगम
अगर लुहणू से गोबिंद सागर झील के नीचे अंडरवाटर पुल बनाया जाता है, तो यह बिलासपुर के लिए वरदान साबित होगा। यह सिर्फ एक टनल नहीं, बल्कि विकास का वह जरिया होगा, जो शहर को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
राज्य के लिए ऐतिहासिक मौका
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने इस परियोजना को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि, यह अभी विचार के चरण में है, लेकिन अगर इस पर काम शुरू हुआ तो यह न केवल हिमाचल प्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय होगा।
क्या आप तैयार हैं इस अनोखी यात्रा के लिए?
यह अंडरवाटर टनल पुल न केवल बिलासपुर को विकास की नई राह देगा, बल्कि देशभर के लोगों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी बनेगा। अगर यह परियोजना धरातल पर उतरती है, तो यह भारत के तकनीकी कौशल और नवाचार की पहचान बन जाएगी।



