तीसरे साल भी सूखे जैसे हालात! क्या Himachal का सेब उद्योग खतरे में है

Is Himachal's apple industry in danger?

Last Updated on February 11, 2025 by Ankur Sood

Himachal प्रदेश में इस साल सर्दियों में बर्फबारी और बारिश की भारी कमी देखी जा रही है। जनवरी में 84% और फरवरी के शुरुआती 11 दिनों में 51% कम बारिश हुई है। इसका सीधा असर किसानों और बागवानों पर पड़ रहा है, जो फसल उत्पादन को लेकर पहले से ही चिंतित थे। हिमाचल प्रदेश में कृषि और बागवानी राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, और लगातार तीसरे साल हो रहे इस मौसमीय बदलाव ने सेब उत्पादन सहित अन्य नकदी फसलों पर गहरा प्रभाव डाला है।

बर्फबारी न होने से सेब की पैदावार पर खतरा

सेब की खेती के लिए सर्दियों में पर्याप्त बर्फबारी जरूरी होती है। बर्फबारी से मिट्टी में नमी बनी रहती है, जिससे पौधों को पर्याप्त पोषण मिलता है। लेकिन इस साल बर्फबारी न होने से सेब के बागों में नमी की भारी कमी देखी जा रही है। Himachal प्रदेश संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने कहा कि बर्फबारी और बारिश न होने से सेब की पैदावार पर सीधा असर पड़ रहा है। सर्दियों में अच्छी बर्फबारी न होने से न केवल पौधों की वृद्धि बाधित हो रही है, बल्कि ऐसे कीट भी सक्रिय हो रहे हैं जो फसलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

लगातार तीसरे साल हो रहा सूखे जैसे हालात का सामना

Himachal के बागवान मोहित शर्मा का कहना है कि यह लगातार तीसरा साल है जब बर्फबारी की कमी से किसानों और बागवानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि बीते साल भी हिमाचल में पर्याप्त बर्फबारी न होने से सेब उत्पादन में भारी गिरावट आई थी। नमी की कमी के कारण सेब का आकार छोटा रह गया था और गुणवत्ता भी प्रभावित हुई थी, जिससे बाजार में अच्छे दाम नहीं मिल पाए।

मोहित शर्मा ने चिंता जताते हुए कहा कि अगर इसी तरह मौसम बदलता रहा तो हिमाचल में सेब उत्पादन पर स्थायी संकट आ सकता है। कई छोटे बागवानों की रोजी-रोटी सेब की खेती पर निर्भर करती है, और अगर यह नुकसान लगातार बढ़ता गया तो उनकी आर्थिक स्थिति भी कमजोर हो सकती है।

राज्य सरकार के लिए भी चिंता का विषय

Himachal प्रदेश में सेब उत्पादन न केवल बागवानों के लिए बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। सेब उत्पादन से हर साल हजारों करोड़ की आमदनी होती है और हजारों लोगों को रोजगार मिलता है। लेकिन मौसम में हो रहे इस बदलाव से प्रदेश सरकार भी चिंतित है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले समय में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो किसानों और बागवानों को बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

क्या कहती हैं मौसम रिपोर्ट्स?

मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ की कमी और जलवायु परिवर्तन की वजह से हिमाचल प्रदेश में सर्दियों के मौसम में बर्फबारी और बारिश कम हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में हल्की बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी होने की संभावना है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं होगी।

सरकार और किसानों के लिए आगे की राह

राज्य सरकार को चाहिए कि वह किसानों और बागवानों के लिए राहत पैकेज की घोषणा करे और जल संरक्षण के उपायों पर जोर दे। वहीं, किसानों और बागवानों को भी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके पानी की कमी से निपटने के उपाय करने चाहिए। ड्रिप इरिगेशन और वाटर हार्वेस्टिंग जैसी तकनीकों को अपनाकर नमी की कमी को कुछ हद तक पूरा किया जा सकता है।

Himachal प्रदेश में बर्फबारी और बारिश की कमी से कृषि और बागवानी पर गंभीर असर पड़ रहा है। सेब उत्पादन पर मंडराता यह संकट न केवल किसानों और बागवानों बल्कि राज्य की आर्थिक स्थिति के लिए भी चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में सरकार को जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने होंगे ताकि इस संकट से निपटा जा सके और हिमाचल के किसानों और बागवानों को राहत मिल सके।

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  • Ankur Sood

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