Last Updated on January 27, 2025 by Ankur Sood
Shimla. हिमाचल प्रदेश के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में से एक, Gudiya Case में आखिरकार फैसला आ गया है। शिमला के बहुचर्चित पुलिस कस्टडी हत्या मामले में अदालत ने ज़ैदी समेत आठ पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया है। यह मामला 2017 में सामने आया था, जब कोटखाई में एक नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप और हत्या की वारदात हुई थी। इस घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था।
क्या है Gudiya Case?
2017 में हिमाचल प्रदेश के कोटखाई क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की का शव जंगल में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। जांच में पता चला कि लड़की के साथ पहले गैंगरेप किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी आक्रोश पैदा किया।
पुलिस ने इस मामले में कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार किया, जिनमें से एक सूरज नाम का व्यक्ति पुलिस कस्टडी में संदिग्ध परिस्थितियों में मारा गया। इस घटना ने हिमाचल पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए।
पुलिस कस्टडी में हत्या और CBI जांच
Gudiya Case में पुलिस कस्टडी में सूरज की मौत ने मामले को और उलझा दिया। परिवार और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि यह हत्या पुलिस द्वारा की गई थी। मामला बढ़ता देख हिमाचल सरकार ने इसे सीबीआई को सौंप दिया।
CBI जांच में सामने आया कि सूरज की मौत पुलिस की पिटाई के कारण हुई थी। इसके बाद ज़ैदी समेत आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
- 261KM की रेंज वाला Ultraviolette Tesseract स्कूटर! मात्र ₹100 में 500KM की सवारी!
- 400 KM की रेंज वाली Mahindra XUV 3XO EV जल्द होगी लॉन्च! Nexon EV को मिलेगी टक्कर
- फिर लौटेगी ठंड! Himachal में शीतलहर का अलर्ट, जानिए कहां होगी बर्फबारी
अदालत का फैसला: ज़ैदी समेत आठ पुलिसकर्मी दोषी
शिमला की विशेष अदालत ने इस मामले में ज़ैदी और अन्य पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने माना कि पुलिसकर्मियों ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हुए सूरज की हत्या की थी। यह फैसला न्यायपालिका के उस दृढ़ संकल्प को दर्शाता है, जिसमें कानून के रक्षक भी कानून के दायरे से बाहर नहीं हैं।
अदालत जल्द ही इन दोषियों के लिए सजा का ऐलान करेगी। यह फैसला न्यायिक प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।
हिमाचल की जनता का प्रतिक्रिया
गुड़िया केस में अदालत के इस फैसले का हिमाचल प्रदेश की जनता ने स्वागत किया है। लोग मानते हैं कि इस फैसले ने न्याय की उम्मीद को मजबूत किया है। हालांकि, लोगों का कहना है कि इस मामले ने पुलिस व्यवस्था पर गहरा सवाल खड़ा किया है और सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
आगे की राह
इस मामले ने पुलिस प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को उजागर किया है। हिमाचल सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कि वह पुलिस व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए। साथ ही, Gudiya case की घटना ने समाज में महिलाओं की सुरक्षा पर गहन चर्चा शुरू कर दी है।
Also Read:






