Last Updated on December 12, 2024 by Ankur Sood
हिमाचल प्रदेश के Mandi जिले में एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। नेरचौक के चाक का गोहर क्षेत्र में स्थित एक ढाबे में गैस सिलेंडर फटने से बड़ा धमाका हुआ। इस हादसे में 7 लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जिनका इलाज नेरचौक मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।
कैसे हुआ हादसा?
मिली जानकारी के अनुसार, नेरचौक मेडिकल कॉलेज के पास स्थित मंडयाली धाम के लिए मशहूर एक ढाबे में अचानक सिलेंडर में आग लग गई। आग लगने के कुछ ही पलों में बड़ा धमाका हो गया, जिससे ढाबे में अफरा-तफरी मच गई। धमाके की आवाज इतनी जोरदार थी कि आसपास के लोग घबरा गए और तुरंत मौके पर पहुंचे।
घायलों की पहचान और स्थिति
हादसे में झुलसे लोगों में ढाबे में काम करने वाले तीन कर्मचारी और चार ग्राहक शामिल हैं।
कर्मचारी:
- महेंद्र
- संतोष
- केशव
ग्राहक:
- अमर चंद
- गिरधारी लाल
- प्रवीण कुमार
- तेज सिंह
सभी घायलों को तुरंत नेरचौक मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, कुछ की हालत गंभीर है और उन पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
घटनास्थल का हाल और प्रशासन की प्रतिक्रिया
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और व्यापार मंडल के अध्यक्ष अमृतपाल सिंह मौके पर पहुंचे। उनके साथ स्थानीय पटवारी और जांच अधिकारी भी मौजूद रहे। प्रशासन ने घटना स्थल का जायजा लिया और ढाबा संचालक राकेश कुमार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
जांच अधिकारी अनिल कटोच ने बताया,
“ढाबे में हुए धमाके की जांच जारी है। घटनास्थल से एक सिलेंडर आग की चपेट में था, जबकि दूसरा छोटा सिलेंडर फटा हुआ पाया गया। धमाके की असल वजह सिलेंडर की खराबी हो सकती है, लेकिन विस्तृत जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।”
ढाबे के आसपास का माहौल
इस हादसे ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। ढाबे के आसपास के लोग अब भी हादसे के डर से सहमे हुए हैं। हादसे के बाद ढाबे का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। आसपास के व्यापारियों ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त की है और प्रशासन से सुरक्षा मानकों को कड़ा करने की मांग की है।
आग लगने की संभावित वजहें
फिलहाल प्रशासन ने आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। कुछ संभावित वजहें हो सकती हैं:
- सिलेंडर की खराबी या लीक होना।
- ढाबे में सुरक्षा मानकों की अनदेखी।
- आग से निपटने के उपायों की कमी।
प्रशासन का कदम और सहायता
प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि:
- घायलों के इलाज का पूरा खर्च उठाया जाएगा।
- ढाबा संचालक को हुए नुकसान के लिए उचित मुआवजा दिया जाएगा।
- सिलेंडर और गैस की आपूर्ति से जुड़े सुरक्षा उपायों पर सख्ती से अमल किया जाएगा।
स्थानीय लोगों की मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि:
- ढाबों और छोटे व्यवसायों में सुरक्षा मानकों की सख्त जांच की जाए।
- गैस सिलेंडर सप्लाई चेन पर निगरानी बढ़ाई जाए।
- भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए कर्मचारियों को फायर सेफ्टी ट्रेनिंग दी जाए।
ऐसे हादसे रोकने के लिए सावधानियां
विशेषज्ञों का कहना है कि सिलेंडर से जुड़े हादसों को रोकने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाने चाहिए:
- नियमित रूप से सिलेंडर और गैस पाइपलाइन की जांच।
- सिलेंडर को हमेशा अच्छी वेंटिलेशन वाले स्थान पर रखना।
- कर्मचारियों और मालिकों को आग से निपटने के उपकरणों और प्रक्रियाओं की ट्रेनिंग।
- किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में तुरंत गैस सप्लाई बंद करना।
निष्कर्ष
इस हादसे ने यह साबित कर दिया है कि छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे इस घटना को एक चेतावनी के तौर पर लें और भविष्य में ऐसे हादसे न हों, इसके लिए सख्त कदम उठाएं।



