Last Updated on January 4, 2025 by Ankur Sood
जनवरी में गर्मी ने तोड़े रिकॉर्ड
हिमाचल प्रदेश की राजधानी Shimla, जो आमतौर पर जनवरी के महीने में बर्फ की चादर से ढकी रहती है, इस बार रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का सामना कर रही है। शिमला में तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, पिछले कई दशकों में जनवरी के महीने में ऐसा तापमान नहीं देखा गया है।
मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
हिमाचल प्रदेश में बढ़ते तापमान को देखते हुए मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। आने वाले दिनों में राज्य के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज और अधिक बदल सकता है। यह स्थिति ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को स्पष्ट रूप से दिखाती है।
क्यों बढ़ रहा है तापमान?
विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में तापमान बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- जलवायु परिवर्तन के प्रभाव।
- ग्लेशियरों के पिघलने की बढ़ती दर।
- वनों की कटाई और शहरीकरण।
- प्रदूषण में वृद्धि।
इन सभी कारकों ने मिलकर हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक मौसम चक्र को बदल दिया है।
कृषि और पर्यटन पर प्रभाव
बढ़ते तापमान का असर न केवल लोगों की दिनचर्या पर पड़ रहा है, बल्कि यह कृषि और पर्यटन उद्योग को भी प्रभावित कर रहा है।
- कृषि: असामान्य तापमान के कारण रबी की फसलों पर खतरा मंडरा रहा है। किसान फसल खराब होने की आशंका से परेशान हैं।
- पर्यटन: शिमला और मनाली जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में बर्फबारी कम होने के कारण पर्यटकों की संख्या में गिरावट आई है।
मौसम विशेषज्ञों की चेतावनी
मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही पर्यावरण संरक्षण के उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले समय में स्थिति और खराब हो सकती है। उन्होंने सरकार और स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ठोस कदम उठाएं।
Shimla के लोगों की प्रतिक्रिया
शिमला के निवासियों ने कहा कि इस साल का जनवरी महीना अब तक का सबसे असामान्य रहा है। स्थानीय लोग बढ़ते तापमान को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि यह उनके जीवन पर गहरा असर डाल रहा है।
तापमान का आंकड़ा
| तारीख | तापमान (डिग्री सेल्सियस) |
|---|---|
| 1 जनवरी 2025 | 15.2 |
| 2 जनवरी 2025 | 16.4 |
| 3 जनवरी 2025 | 17.1 |
| 4 जनवरी 2025 | 18.3 |
| 5 जनवरी 2025 | 18.9 |
Shimla में जनवरी के महीने में रिकॉर्ड गर्मी ने पर्यावरण और जलवायु पर मंडरा रहे खतरे की घंटी बजा दी है। अगर समय रहते पर्यावरण संरक्षण के उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। हिमाचल प्रदेश के लोगों और सरकार के लिए यह समय है कि वे मिलकर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ ठोस कदम उठाएं।



