Last Updated on December 17, 2024 by Ankur Sood
शिमला: राज्य बिजली बोर्ड के 81 Outsourced drivers की बर्खास्तगी ने कर्मचारियों के बीच उबाल ला दिया है। सोमवार को राज्य बिजली बोर्ड आउटसोर्स इम्प्लाइज यूनियन ने बोर्ड मुख्यालय के बाहर जोरदार धरना प्रदर्शन किया। यूनियन का कहना है कि ये चालक पिछले 12-13 वर्षों से बिजली बोर्ड में सेवाएं दे रहे थे, लेकिन 1 नवंबर 2024 को अचानक उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
कर्मचारियों की नाराजगी और मांगें
यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने कहा, “यह फैसला न केवल कर्मचारियों के लिए अनुचित है, बल्कि उनके भविष्य को भी अंधकारमय बना रहा है।” उन्होंने मांग की कि 81 Outsourced drivers की सेवाओं को तुरंत बहाल किया जाए।
धरने में संयुक्त कर्मचारी-अभियंता मोर्चा ने भी समर्थन दिया। मोर्चा के संयोजक लोकेश ठाकुर और सह संयोजक हीरा लाल वर्मा ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा,
“सरकार को इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत पुनर्विचार करना चाहिए।”
संघ की चेतावनी: राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान
आउटसोर्स इम्प्लाइज यूनियन के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर 81 चालकों की सेवाओं को जल्द बहाल नहीं किया गया, तो यह आंदोलन पूरे राज्य में फैल सकता है।
यूनियन के सचिव राजेश चौहान और उपप्रधान पुनीत सोनी ने कहा,
“अगर समस्या का हल नहीं निकला तो हम 3100 आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ राज्यव्यापी हड़ताल के लिए मजबूर होंगे। यह स्थिति न केवल कर्मचारियों के लिए, बल्कि बिजली बोर्ड के संचालन के लिए भी गंभीर हो सकती है।”
23 दिसंबर को होगी महत्वपूर्ण बैठक
इस मुद्दे के समाधान के लिए बिजली बोर्ड प्रबंधन और कर्मचारी-अभियंता मोर्चा के बीच 23 दिसंबर को एक अहम बैठक प्रस्तावित है। बैठक में 81 आउटसोर्स चालकों की सेवाओं की बहाली पर चर्चा होगी।
सरकार ने इस पर पुनर्विचार का आश्वासन दिया है, लेकिन कर्मचारी त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
प्रबंधन से देरी पर गहरी चिंता
यूनियन नेताओं ने प्रबंधन की चुप्पी पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि
“इस तरह की देरी से कर्मचारियों का विश्वास टूट रहा है। हमें उम्मीद है कि 23 दिसंबर की बैठक में इस समस्या का समाधान निकलेगा।”क्या होगा आगे का रास्ता?
अगर सरकार या बोर्ड प्रबंधन चालकों की सेवाओं को बहाल करने में नाकाम रहते हैं, तो यह आंदोलन पूरे राज्य में बिजली सप्लाई को प्रभावित कर सकता है। यूनियन का कहना है कि यह मामला केवल 81 चालकों का नहीं है, बल्कि पूरे राज्य के आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य का सवाल है।
बर्खास्तगी के पीछे का सवाल
यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि 81 चालकों की बर्खास्तगी का असल कारण क्या था। हालांकि, यूनियन का आरोप है कि यह फैसला अन्यायपूर्ण और असंवेदनशील है।
क्या कहती है सरकार?
राज्य सरकार ने पुनर्विचार का आश्वासन दिया है। लेकिन कर्मचारियों को अब ठोस कदम की उम्मीद है।
81 Outsourced drivers की बर्खास्तगी ने कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच तनाव को बढ़ा दिया है।
क्या 23 दिसंबर की बैठक इस संकट का समाधान ला पाएगी?
अगर इस मुद्दे का हल नहीं निकला, तो राज्य को एक बड़े आंदोलन का सामना करना पड़ सकता है।क्या आप मानते हैं कि आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ यह फैसला अनुचित है? अपनी राय नीचे कमेंट में साझा करें!



