Last Updated on February 6, 2025 by Ankur Sood
हिमाचल प्रदेश के Solan जिले से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है। यहाँ एक जिंदा महिला का कागजों में अंतिम संस्कार कर दिया गया और नगर निगम ने बाकायदा मृत्यु प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया।
यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब बीमा कंपनी का एक अधिकारी महिला के परिजनों से जीवन बीमा पॉलिसी की राशि जारी करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की पुष्टि करने पहुँचा। जैसे ही महिला को इस बात का पता चला कि उसे कागजों में मृत घोषित किया जा चुका है, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। इस घटना से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस व प्रशासन हरकत में आ गए।
फर्जीवाड़े की परतें खुलीं, नगर निगम में मचा हड़कंप
जैसे ही महिला को अपनी कथित ‘मृत्यु’ के बारे में पता चला, वह तत्काल नगर निगम कार्यालय पहुँची और अधिकारियों से जवाब तलब किया। यहाँ अधिकारियों को भी यह सुनकर गहरा झटका लगा कि जिस महिला को उन्होंने मृत घोषित कर दिया था, वह खुद उनके सामने खड़ी थी।
नगर निगम ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल मृत्यु प्रमाणपत्र को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी और पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने भी पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
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कैसे हुआ यह बड़ा फर्जीवाड़ा?
जांच में सामने आया कि महिला के नाम पर श्मशानघाट से लकड़ी खरीदी गई थी और अंतिम संस्कार के दस्तावेज तैयार किए गए थे। यहाँ तक कि मोक्षधाम चंबाघाट में ‘फॉर्म-2’ भरकर दो प्रत्यक्षदर्शियों के हस्ताक्षर भी लिए गए थे।
इसके बाद Solan नगर निगम को अंतिम संस्कार की सूचना भेजी गई और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की अर्जी लगाई गई। चौंकाने वाली बात यह है कि नगर निगम ने बिना किसी उचित जांच-पड़ताल के मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर दिया।
बीमा राशि हड़पने की साजिश!
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा संदेह महिला की जीवन बीमा पॉलिसी पर है। आशंका जताई जा रही है कि किसी ने महिला की बीमा पॉलिसी की राशि हड़पने के लिए यह साजिश रची थी।
क्योंकि बीमा कंपनियाँ दावा निपटाने से पहले मृत्यु प्रमाणपत्र की माँग करती हैं, इसलिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यह धोखाधड़ी की गई। लेकिन संयोग से बीमा कंपनी के अधिकारी ने सीधे महिला के घर जाकर पुष्टि करनी चाही और इस तरह यह फर्जीवाड़ा सामने आ गया।
नगर निगम और पुलिस की भूमिका पर सवाल
इस घटना ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना किसी गहन जांच के मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करना प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है।
अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं, और किसके कहने पर मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किया गया।
श्मशानघाट कर्मियों से भी होगी पूछताछ
जांच में यह भी सामने आया है कि श्मशानघाट कर्मियों को बिना किसी संदेह के फॉर्म-2 पर हस्ताक्षर कैसे करवा लिए गए? आखिर वहाँ अंतिम संस्कार किसका हुआ, और उसके लिए आधार कार्ड किसने उपलब्ध कराया?
अब पुलिस ने श्मशानघाट कर्मचारियों को तलब कर लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। साथ ही नगर निगम के संबंधित अधिकारियों से भी जवाब माँगा जा रहा है।
महिला और उसके परिवार की हालत खराब
इस घटना के बाद महिला और उसके परिवार वाले बेहद परेशान हैं। महिला ने नगर निगम को अपने आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज दिखाकर खुद को जिंदा साबित किया।
परिवार का कहना है कि अगर बीमा कंपनी का अधिकारी घर नहीं आता, तो उन्हें शायद इस धोखाधड़ी का कभी पता ही नहीं चलता।
क्या होगी कार्रवाई?
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि यह साजिश परिवार के किसी सदस्य ने की है, या किसी बाहरी व्यक्ति ने फर्जीवाड़ा किया है।
Solan नगर निगम भी अपने स्तर पर इस मामले की पड़ताल कर रहा है कि मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने में कहां चूक हुई और इसमें कौन जिम्मेदार है।
क्या कहती है पुलिस?
Solan थाना प्रभारी हंसराज रुंगटा ने बताया कि नगर निगम की ओर से शिकायत प्राप्त हुई है और पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसमें शामिल दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही आरोपियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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