Last Updated on December 13, 2024 by Ankur Sood
हिमाचल प्रदेश के छोटे किसानों और उत्पादकों की अनदेखी पर शुक्रवार को लोकसभा में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने जोरदार तरीके से आवाज उठाई। यह उनका पहला लोकसभा भाषण था, जिसमें उन्होंने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नीतियों में बदलाव करके बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाया गया, जबकि छोटे किसानों की आजीविका को नजरअंदाज कर दिया गया।
हिमाचल के किसानों पर पड़ा असर
प्रियंका गांधी ने अपने भाषण में किसी उद्योगपति का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उनके बयानों को अदानी एग्री फ्रेश के हिमाचल प्रदेश में स्थित फ्रूट कलेक्शन सेंटर और कोल्ड स्टोरेज से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, “सरकार की नीतियों का दुरुपयोग बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है, जिससे हिमाचल के छोटे किसानों का हक छीना जा रहा है।”
अदानी कोल्ड स्टोरेज पर उठे सवाल
प्रियंका गांधी के इस बयान के बाद हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने अदानी कोल्ड स्टोरेज परियोजना पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने खुलासा किया कि शिमला जिले में बने इस कोल्ड स्टोरेज को 80-90 प्रतिशत सरकारी अनुदान पर बनाया गया है।
इस परियोजना के तहत 30-40 प्रतिशत क्षमता हिमाचल के स्थानीय किसानों की फसलों के लिए आरक्षित होनी चाहिए थी, लेकिन चौहान का कहना है कि किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने इसे हिमाचल के किसानों के साथ अन्याय बताया और कहा कि सरकार इस मुद्दे पर जल्द कार्रवाई करेगी।
हिमाचल की अर्थव्यवस्था और किसानों का भविष्य
हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा कृषि और बागवानी पर आधारित है। खासकर सेब, जिसे “हिमाचल का सोना” कहा जाता है, प्रदेश की आय का प्रमुख स्रोत है। कोल्ड स्टोरेज और फ्रूट कलेक्शन सेंटर जैसी परियोजनाएं छोटे किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं।
लेकिन, जब इनका फायदा केवल बड़े उद्योगपतियों तक सीमित रह जाए, तो छोटे किसानों की आजीविका प्रभावित होती है। चौहान ने कहा कि “जब कोई परियोजना सरकारी अनुदान से बनाई जाती है, तो यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इसका लाभ क्षेत्रीय किसानों को मिले।”
प्रियंका गांधी ने क्या कहा?
प्रियंका गांधी ने इस मौके पर सीधे-सीधे भाजपा सरकार को घेरा और कहा कि यह सरकार सिर्फ बड़े कॉरपोरेट्स के हितों की रक्षा में लगी है। उन्होंने कहा, “हिमाचल जैसे राज्यों के किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों की अनदेखी अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
क्या बोले हिमाचल के किसान?
हिमाचल के किसानों ने प्रियंका गांधी के इस बयान का समर्थन किया है। उनका कहना है कि बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के चक्कर में छोटे किसानों की आवाज दबाई जा रही है। कई किसानों ने आरोप लगाया कि कोल्ड स्टोरेज का उपयोग उनकी फसलों के बजाय बड़े व्यापारियों की उपज के लिए किया जा रहा है।
सरकार की अगली रणनीति क्या होगी?
नरेश चौहान के बयान के बाद हिमाचल सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सरकार कोल्ड स्टोरेज परियोजनाओं की समीक्षा करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि उनके लाभ सही हाथों तक पहुंचे।
यह मुद्दा हिमाचल के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनकी आजीविका का बड़ा हिस्सा कृषि और बागवानी पर निर्भर करता है। प्रियंका गांधी के इस बयान ने न केवल हिमाचल, बल्कि पूरे देश के किसानों के लिए एक नई बहस छेड़ दी है।
क्या सरकार छोटे किसानों के हितों की रक्षा कर पाएगी, या फिर बड़े उद्योगपतियों के पक्ष में झुकी रहेगी? यह देखना बाकी है। हिमाचल के किसानों का भविष्य अब सरकार की अगली कार्रवाई पर निर्भर करता है।



