Last Updated on February 9, 2025 by Ankur Sood
Guwahati. Manipur के मुख्यमंत्री N. Biren Singh ने आज अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में भाजपा नेतृत्व के खिलाफ असंतोष बढ़ता जा रहा था और कांग्रेस ने विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर ली थी। राज्यपाल को सौंपे गए अपने इस्तीफे के साथ, बीरेन सिंह ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से विचार-विमर्श करने के बाद यह बड़ा निर्णय लिया।
भाजपा में बगावत के संकेत, नेतृत्व परिवर्तन की मांग
सूत्रों के अनुसार, भाजपा के करीब 12 विधायक मुख्यमंत्री के नेतृत्व से नाराज थे और नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहे थे। इसके अलावा, करीब छह विधायक अभी भी असमंजस में थे, लेकिन वे भी इस असंतोष में शामिल हो सकते थे।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा थी कि अगर विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान होता, तो असंतुष्ट विधायक पार्टी व्हिप को नज़रअंदाज़ कर सकते थे। भाजपा के पास बहुमत होने के बावजूद, नेतृत्व में बदलाव की मांग को देखते हुए पार्टी को यह डर था कि अगर विधायक व्हिप का उल्लंघन करते, तो सरकार गिर भी सकती थी।
दिल्ली में अमित शाह और जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद इस्तीफा
N. Biren Singh आज सुबह दिल्ली गए थे, जहां उन्होंने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में भाजपा नेतृत्व ने उन्हें इस्तीफा देने की सलाह दी, ताकि पार्टी के अंदर चल रहे असंतोष को रोका जा सके।
सूत्रों का कहना है कि भाजपा हाईकमान इस समय कोई भी राजनीतिक संकट नहीं चाहता, खासकर तब जब पार्टी महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली के चुनावों में सफल प्रदर्शन कर रही है। मणिपुर की स्थिति कहीं न कहीं पार्टी के लिए सकारात्मक राजनीतिक माहौल पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती थी।
जातीय हिंसा और leaked audio tapes बने बड़ी वजह
Biren Singh के खिलाफ नाराजगी की एक बड़ी वजह राज्य में जारी जातीय हिंसा भी रही। मई 2023 में मणिपुर में कुकी और मैतेई समुदायों के बीच बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी और हजारों लोग विस्थापित हो गए थे।
इस हिंसा के संबंध में एक कुकी समुदाय के व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मुख्यमंत्री बीरेन सिंह पर हिंसा को भड़काने का आरोप लगाया था। यह आरोप तब और गंभीर हो गया जब कुछ लीक ऑडियो टेप सामने आए, जिसमें कथित तौर पर बीरेन सिंह की आवाज थी।
एक निजी फॉरेंसिक लैब “ट्रुथ लैब्स” ने पुष्टि की कि ऑडियो टेप के 93% हिस्से मुख्यमंत्री की आवाज से मेल खाते हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय फॉरेंसिक साइंस लैब से रिपोर्ट मांगी है।
भाजपा को नुकसान पहुंचा सकता था राजनीतिक संकट
बीजेपी की रणनीति हमेशा राज्यों में स्थिरता बनाए रखने और मजबूत नेतृत्व देने की रही है। लेकिन मणिपुर में बढ़ते असंतोष और संभावित अविश्वास प्रस्ताव के चलते पार्टी के लिए यह संभावित नुकसानदायक स्थिति बन गई थी।
इसके अलावा, अमित शाह के साथ कई असंतुष्ट विधायकों की मुलाकात ने भी यह संकेत दे दिया था कि पार्टी के भीतर विद्रोह हो सकता है। ऐसे में भाजपा को डर था कि अगर विधायक पार्टी के खिलाफ जाकर अविश्वास प्रस्ताव के दौरान मतदान करते या फ्लोर टेस्ट का बहिष्कार करते, तो राज्य में अस्थिरता की स्थिति पैदा हो सकती थी।
अब अगला मुख्यमंत्री कौन?
Biren Singh के इस्तीफे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मणिपुर का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?
भाजपा नेतृत्व किसी ऐसे नेता को आगे लाना चाहेगा, जो न केवल पार्टी को एकजुट रख सके, बल्कि राज्य में शांति बहाल करने के लिए भी प्रभावी साबित हो। फिलहाल, अगले मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चाएं जारी हैं, और पार्टी हाईकमान जल्द ही इस पर फैसला ले सकता है।
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. Biren Singh का इस्तीफा राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है। जातीय हिंसा, पार्टी के अंदर असंतोष, और ऑडियो टेप विवाद के चलते भाजपा नेतृत्व ने यह बड़ा फैसला लिया।
अब देखना होगा कि भाजपा मणिपुर में नेतृत्व परिवर्तन कैसे करती है और क्या नए मुख्यमंत्री राज्य में स्थिरता ला पाएंगे। वहीं, कांग्रेस इस मौके का फायदा उठाकर सरकार के खिलाफ अपने राजनीतिक अभियान को और तेज कर सकती है।
Source : ANI
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