Last Updated on December 18, 2024 by Ankur Sood
राजनीति में गरमाहट, Amit Shah ने कांग्रेस पर साधा निशाना
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में ऐसा बयान दिया जिसने देश की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। शाह ने कहा कि अगर वह इस्तीफा भी दे दें, तो भी कांग्रेस पार्टी अगले 15 साल तक सत्ता में नहीं आ पाएगी। यह बयान कांग्रेस के लिए एक करारा वार माना जा रहा है, जो पहले ही अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है।
“अंबेडकर का नाम लेना कांग्रेस का नया फैशन”
संविधान दिवस पर राज्यसभा में बोलते हुए अमित शाह ने कांग्रेस पर अंबेडकर के नाम का सिर्फ दिखावा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा,
“आजकल कांग्रेस में अंबेडकर का नाम लेना एक फैशन बन गया है। अगर उन्होंने बाबा साहेब के नाम का इतना इस्तेमाल भगवान का नाम लेने में किया होता, तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता।”
इस तीखे बयान के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच तलवारें खिंच गईं।
Congress का पलटवार: “अंबेडकर का अपमान किया”
कांग्रेस ने अमित शाह के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे अंबेडकर का अपमान करार देते हुए शाह से माफी मांगने की मांग की। खड़गे ने कहा,
“अमित शाह जी ने देश के दलित समुदाय और बाबा साहेब का अपमान किया है। उन्हें तुरंत माफी मांगनी चाहिए।”
अमित शाह का जवाब: “सच छुपाने के लिए कांग्रेस मुद्दे भटका रही है”
खड़गे के आरोपों का जवाब देते हुए अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कांग्रेस अपने असफलताओं से ध्यान हटाने के लिए ऐसे मुद्दों को उठा रही है। उन्होंने कहा,
“खड़गे जी को अगर मेरा इस्तीफा चाहिए, तो मैं दे दूं। लेकिन इससे कांग्रेस की हालत नहीं सुधरेगी। कांग्रेस को 15 साल तक विपक्ष में बैठने के लिए तैयार रहना चाहिए।”
अमित शाह ने दावा किया कि कांग्रेस पार्टी अब जनता से पूरी तरह कट चुकी है और उनके पास कोई ठोस नीतियां नहीं हैं।
भाजपा का अंबेडकर प्रेम बनाम कांग्रेस का आरोप
अमित शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा हमेशा से बाबा साहेब के आदर्शों का पालन करती आई है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने अंबेडकर की नीतियों को आगे बढ़ाने का काम किया है।
“हमने आरक्षण को और मजबूत किया है। अंबेडकर जी ने जो संविधान दिया, वह हमारी प्रेरणा है। कांग्रेस ने अंबेडकर के योगदान को सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया है।”
राजनीतिक विश्लेषण: Congress के लिए यह क्यों है चिंता का विषय?
अमित शाह के इस बयान को कई राजनीतिक विशेषज्ञों ने कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर एक कटाक्ष माना है। 2014 के बाद से कांग्रेस का लगातार गिरता जनाधार, राज्यों में सत्ता का नुकसान और पार्टी में युवा नेतृत्व की कमी जैसे मुद्दे इसे और गहरा बना रहे हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भाजपा का यह बयान दलित वोट बैंक पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश है। बाबा साहेब अंबेडकर का नाम हर चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और इस बार भी यही हो रहा है।
क्या होगा Congress का अगला कदम?
इस पूरे विवाद के बाद कांग्रेस के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं। पार्टी का नेतृत्व पहले से ही सवालों के घेरे में है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि वह भाजपा के इस आक्रामक रुख का किस तरह जवाब देती है।
अमित शाह और कांग्रेस के बीच यह विवाद भारतीय राजनीति की गहराई में छिपे वैचारिक संघर्ष को उजागर करता है। बाबा साहेब अंबेडकर का नाम इस लड़ाई में सिर्फ एक प्रतीक है। आगामी चुनावों में इस विवाद का असर दलित और अन्य पिछड़े वर्गों के वोटों पर पड़ सकता है।
क्या कांग्रेस इन आरोपों से उबर पाएगी? या भाजपा की रणनीति एक बार फिर कामयाब होगी?



