Himachal Bhawan कुर्की आदेश: 64 करोड़ वसूली का High Court का सख्त निर्देश

Himachal Bhawan attachment order: High Court's strict order to recover Rs 64 crore

Last Updated on November 19, 2024 by Ankur Sood

Himachal Pradesh High Court के न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने सेली कंपनी द्वारा 64 करोड़ रुपये का अपफ्रंट प्रीमियम अदा न करने पर हिमाचल भवन, नई दिल्ली की संपत्ति कुर्क करने के आदेश पारित किए हैं। इसके साथ ही अदालत ने कंपनी को यह राशि 7% ब्याज सहित, याचिका दायर होने की तारीख से अदा करने को कहा है।

दोषी अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

अदालत ने प्रधान सचिव ऊर्जा को 15 दिनों के भीतर जांच कर यह पता लगाने का निर्देश दिया है कि किन अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह राशि समय पर जमा नहीं हो पाई। ब्याज की राशि दोषी अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से वसूलने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 6 दिसंबर को होगी।

2009 में हुआ था बिजली प्रोजेक्ट का आवंटन

सरकार ने वर्ष 2009 में सेली कंपनी को लाहौल-स्पीति में 320 मेगावाट का बिजली प्रोजेक्ट आवंटित किया था। उस समय, प्रोजेक्ट के लिए बीआरओ को सड़कों के निर्माण का कार्य सौंपा गया था। समझौते के तहत, सरकार का दायित्व था कि वह कंपनी को प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाए।

प्रोजेक्ट बंद करने पर जब्त हुआ प्रीमियम

कंपनी के वकील ने अदालत को बताया कि सरकार द्वारा मूलभूत सुविधाएं न मिलने के कारण प्रोजेक्ट बंद करना पड़ा और इसे वापस सरकार को सौंप दिया गया। इसके बाद, सरकार ने कंपनी का 64 करोड़ रुपये का अपफ्रंट प्रीमियम जब्त कर लिया। इस पर कंपनी ने वर्ष 2017 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

हाईकोर्ट का आदेश

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने सरकार को सेली कंपनी को 64 करोड़ रुपये ब्याज सहित वापस करने का आदेश दिया। हालांकि, सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए एलपीए दायर कर दी है।

जयराम ठाकुर का सरकार पर निशाना

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि हिमाचल भवन जैसी प्रतिष्ठित संपत्ति को कुर्क करने का आदेश प्रदेश के लिए शर्म की बात है। उन्होंने कहा, “हिमाचल प्रदेश, जो देश में हाइड्रो पावर उत्पादन का प्रमुख केंद्र है, आज नीलामी की कगार पर खड़ा है। वर्तमान सरकार ने न केवल प्रदेश के हाइड्रो प्रोजेक्ट्स को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि निवेशकों के लिए भी प्रतिकूल माहौल बनाया है।”

निष्कर्ष

हिमाचल प्रदेश में ऊर्जा क्षेत्र की इस घटना ने राज्य प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सरकार और निजी निवेशकों के बीच सहयोग के अभाव के कारण प्रदेश की आर्थिक संभावनाओं पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

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  • Ankur Sood

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