Nauni विवि की सफलता: सब्जियों की नई किस्मों को मिली राष्ट्रीय पहचान

Success of Nauni University: New varieties of vegetables got national recognition

Last Updated on November 19, 2024 by Ankur Sood

नौणी विवि की वैज्ञानिक उपलब्धि

Nauni University के सब्जी विज्ञान विभाग ने गाजर और फ्रांस बीन की उन्नत किस्मों को विकसित कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। शीतोष्ण गाजर की किस्म सोलन श्रेष्ठ और फ्रांस बीन की किस्म लक्ष्मी को हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय किस्म रिलीज समिति (सीवीआरसी) द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर जारी किया गया। इन किस्मों को उत्कृष्ट प्रदर्शन और बेहतर उत्पादकता के लिए मान्यता दी गई है।

अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपी) के तहत इन किस्मों को वर्षों तक कठोर परीक्षण के बाद मंजूरी दी गई। इस परियोजना के समन्वयक डॉ. राजेश कुमार ने नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय विमोचन कार्यक्रम में इन किस्मों की प्रस्तुति दी।

फ्रांस बीन लक्ष्मी और गाजर सोलन श्रेष्ठ की खासियत

सोलन श्रेष्ठ (गाजर)

  • स्वरूप: लंबी, बेलनाकार और आकर्षक नारंगी रंग की जड़ें।
  • पोषण: कैरोटीन से भरपूर, जो पोषण के लिए अत्यधिक उपयोगी है।
  • विशेषताएं:
    • बाल रहित, मुलायम और जल्दी तैयार होने वाली किस्म।
    • आम बीमारियों और कीटों के प्रति प्रतिरोधी।
  • उत्पादकता: जड़ों का औसत वजन 255-265 ग्राम। प्रति हेक्टेयर 225-275 क्विंटल विपणन योग्य उपज।

लक्ष्मी (फ्रांस बीन)

  • स्वरूप: लंबी, हरी, आकर्षक और बिना डोरी वाली फलियां।
  • पकने का समय: 65-70 दिन।
  • विशेषताएं:
    • प्रति नोड 2-3 फलियां उत्पन्न होती हैं।
    • परिपक्व बीज हल्के पीले रंग की पट्टियों के साथ सफेद।
  • उत्पादकता: प्रति हेक्टेयर 150-200 क्विंटल उपज।

खेती के लिए क्षेत्रों की सिफारिश

  • फ्रांस बीन लक्ष्मी:
    • जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में उपयुक्त।
    • पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में भी अनुशंसित।
  • सोलन श्रेष्ठ (गाजर):
    • पंजाब और बिहार के चुनिंदा इलाकों के लिए उपयुक्त।

वर्षों के प्रयास से मिली सफलता

  • गाजर की किस्म सोलन श्रेष्ठ को 2016 में और फ्रांस बीन लक्ष्मी को 1992 में नौणी विवि ने विकसित किया था।
  • 2017 और 2019 के बीच एआईसीआरपी के तहत इन किस्मों का गहन परीक्षण किया गया, जिसके बाद इन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जारी किया गया।

नौणी विवि के वैज्ञानिकों की सराहना

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने वैज्ञानिकों और अनुसंधानकर्ताओं के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इसे किसानों और राष्ट्रीय कृषि प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

Author

  • Ankur Sood

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