Last Updated on December 1, 2024 by Ankur Sood
Manali. Himachal Pradesh के प्रसिद्ध Rohtang Pass में रविवार सुबह हल्की Snowfall हुई। इससे पहले शनिवार को भी यहां बर्फबारी देखने को मिली थी। वहीं, कोकसर क्षेत्र में रविवार सुबह ओलावृष्टि हुई। बीते 36 घंटों से लाहौल और मनाली के ऊंचे इलाकों में मौसम लगातार बदल रहा है। इसके विपरीत, मनाली और कुल्लू के निचले इलाकों में सुबह से धूप खिली हुई है। हालांकि, किसानों और बागवानों की नजरें पिछले चार महीनों से बारिश के इंतजार में आसमान पर टिकी हुई हैं।
पर्यटन उद्योग पर बर्फबारी का प्रभाव
Kullu जिला पर्यटन विकास अधिकारी सुनयना शर्मा ने बताया कि बर्फबारी पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण है। “सर्दियों के दौरान होने वाली बर्फबारी से पर्यटन उद्योग को बड़ा लाभ मिलता है। अगर बर्फबारी समय पर होती है, तो पर्यटन का मौसम भी जल्दी शुरू हो जाता है। हालांकि, इस बार मनाली और उसके आसपास के इलाकों में बर्फबारी न होने से पर्यटकों की संख्या में गिरावट देखी गई है। सिस्सू और हामटा की तरफ थोड़ी बहुत बर्फबारी हुई है, लेकिन वह पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त नहीं है,” उन्होंने कहा।
पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार Kullu Manali आने वाले पर्यटकों की संख्या में कमी देखी गई है। यह कमी क्षेत्र के पर्यटन व्यवसाय पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।
प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी बदला मौसम
रोहतांग, बारालाचा और कुंजुम दर्रे में शनिवार को भी बर्फबारी हुई। वहीं, हिमाचल प्रदेश के मैदानी जिलों में सुबह और शाम को कोहरे का असर देखा जा रहा है। राजधानी शिमला में हल्के बादल और धूप के साथ मिला-जुला मौसम बना हुआ है। मौसम विभाग ने रविवार को भी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी का पूर्वानुमान जताया है, जबकि शेष प्रदेश में मौसम शुष्क रहने की संभावना है।
ताबो, कुकुमसेरी और समदो जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में शुक्रवार रात न्यूनतम तापमान माइनस में दर्ज किया गया। शनिवार को राज्य के अधिकतम तापमान में भी गिरावट देखी गई।
123 वर्षों में तीसरी सबसे कम बारिश
हिमाचल प्रदेश में नवंबर 2024 में 123 वर्षों में तीसरी सबसे कम बारिश दर्ज की गई। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के आंकड़ों के अनुसार, इस महीने राज्य में मात्र 0.2 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 99% कम है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 19.7 मिलीमीटर बारिश होती है।
प्रदेश के हमीरपुर, बिलासपुर, सोलन, सिरमौर, कुल्लू, कांगड़ा, मंडी, शिमला, ऊना और चंबा जिलों में पूरे नवंबर के दौरान बारिश नहीं हुई। वर्ष 1925 में नवंबर में सबसे अधिक 88.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी।
श्रीखंड महादेव की चोटियों से बर्फ गायब
हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध धार्मिक यात्रा श्रीखंड महादेव की ऊंची चोटियों से इस बार बर्फ पूरी तरह गायब है। नित्थर के बुजुर्गों का कहना है कि पिछले 20 वर्षों में यह पहली बार है जब इन चोटियों पर बर्फ नहीं है। आमतौर पर यह चोटियां पूरे साल बर्फ से ढकी रहती थीं।
मौसम की इस बेरुखी से न केवल धार्मिक यात्रा प्रभावित हुई है, बल्कि किसान और बागवान भी चिंतित हैं। नित्थर के सेब बहुल क्षेत्र एडशी, कुठेड़, कंडागई, लोट और दुराह जैसे इलाकों में सूखे की वजह से फसलें प्रभावित हो रही हैं। निचले क्षेत्रों में भी बारिश न होने के कारण मटर और अन्य सब्जियों की बुवाई नहीं हो पा रही है।
सेब के पेड़ों पर सूखे का असर
सेब उत्पादन में भी सूखे का गंभीर प्रभाव देखा जा रहा है। बागवान भूपेंद्र ठाकुर, सुनील भारती, बबनेश और अन्य ने बताया कि सेब के पेड़ों में कैंकर और वूली एफिड जैसी बीमारियां फैल रही हैं। इन बीमारियों के कारण पेड़ों की खाल निकल रही है और सफेद फफूंद लग रही है, जो सेब के लिए बेहद हानिकारक है।
बागवान न तो खाद डाल पा रहे हैं और न ही प्रूनिंग कर पा रहे हैं। बारिश न होने की वजह से सेब के नए पौधे भी नहीं लगाए जा रहे हैं। इससे कृषि और बागवानी उद्योग पर गहरा असर पड़ा है।
निष्कर्ष
हिमाचल प्रदेश में मौसम की बेरुखी न केवल पर्यटकों के उत्साह को प्रभावित कर रही है, बल्कि किसानों और बागवानों के लिए भी गंभीर समस्या बन गई है। शुष्क मौसम और बर्फबारी में देरी से राज्य का पर्यटन उद्योग और कृषि क्षेत्र दोनों ही नुकसान झेल रहे हैं। इससे उबरने के लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन को सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है।



